Varanasi: मैदागिन स्थित सप्तसागर दवा मंडी, जिसे पूर्वांचल का सबसे बड़ा औषधि केंद्र माना जाता है, इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी का खुलासा न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बना है, बल्कि इसने व्यापार की नींव को भी हिला दिया है।
गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
30 नवंबर को इस मामले (Varanasi) के कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल की गिरफ्तारी ने घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया। पुलिस और ड्रग्स विभाग की लगातार छापेमारी से मंडी का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। अब तक 35 से अधिक फर्मों पर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिससे व्यापारियों के बीच भय और असमंजस का वातावरण है।
Varanasi: व्यापार पर पड़ा सीधा असर
व्यापारियों का कहना है कि इस कांड ने उनकी साख और कारोबार दोनों को गहरी चोट पहुंचाई है। थोक खरीदारों की आवाजाही में भारी कमी आई है और कई व्यापारी (Varanasi) अब लखनऊ और कानपुर की मंडियों की ओर रुख कर रहे हैं। अनुमान है कि बीते दो हफ्तों में कारोबार लगभग 30% तक गिर चुका है। यह गिरावट केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि मंडी की प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिह्न है।
सप्तसागर मंडी (Varanasi) के व्यापारी संदीप चतुर्वेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला मंडी की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। विभागीय जांच और पुलिस की मौजूदगी ने आम खरीदारों के बीच अविश्वास का माहौल बना दिया है। व्यापारी चाहते हैं कि जल्द से जल्द सच्चाई सामने आए ताकि मंडी की छवि बचाई जा सके।
व्यापारियों की चिंता और उम्मीद
व्यापारियों का मानना है कि यदि इस मामले का समाधान शीघ्र नहीं हुआ तो वाराणसी की दवा मंडी (Varanasi) का भविष्य संकट में पड़ सकता है। वे चाहते हैं कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाए और निर्दोष व्यापारियों को राहत दे। पारदर्शिता और विश्वास ही इस मंडी की असली ताकत है, जिसे बचाना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

