Ghazipur जनपद के नोनहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम व पोस्ट खालिसपुर के किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। आवारा एवं पालतू पशुओं द्वारा लगातार फसलों को नष्ट किए जाने से परेशान किसानों (Ghazipur) ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर फसल सुरक्षा की गुहार लगाई है। किसानों का आरोप है कि बीते चार वर्षों से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रार्थना पत्र में डॉ० दिलीप कुमार सिंह पुत्र उपेन्द्रनाथ सिंह सहित अन्य किसानगणों ने बताया कि खालिसपुर (Ghazipur) मौजा में सब्जी, अनाज और दलहन की मुख्य खेती कर वे अपना जीवनयापन करते हैं। गंगा नदी के दियारा क्षेत्र में पतलो और राढ़ा बनने के कारण सैकड़ों की संख्या में पशु वहीं डेरा जमाए हुए हैं। यही पशु रात के अंधेरे में किसानों के खेतों पर टूट पड़ते हैं और तैयार फसलों को रौंदकर बर्बाद कर देते हैं।
Ghazipur:अवारा पशुओं पर कोई कार्रवाई नही
किसानों के अनुसार, प्रतिदिन रात के समय करीब 400 से 500 पशु खेतों में घुसकर भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस समस्या को लेकर मई और जून माह में आयोजित किसान दिवस के दौरान मुख्य विकास अधिकारी गाजीपुर (Ghazipur) को भी अवगत कराया गया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि किसानों ने अपनी फसलों की रक्षा के लिए खेतों में बैरिकेडिंग और जाल तक लगवाए, इसके बावजूद पशु फसलें नष्ट कर रहे हैं। मजबूरी में ठंड के मौसम में भी किसान रात-रात भर खेतों में रुककर पहरा देने को विवश हैं। इससे न सिर्फ उनकी फसल बल्कि उनका स्वास्थ्य और परिवारिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
हताश किसानों ने की मुख्यमंत्री से मांग
निराश और हताश किसानों (Ghazipur) ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि रात्रिकालीन समय में विशेष कैंप लगवाकर आवारा और पालतू पशुओं को पकड़वाया जाए तथा उन्हें गौशालाओं में भेजने की व्यवस्था कराई जाए। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो खेती करना उनके लिए असंभव हो जाएगा। पत्र के माध्यम से किसानों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपनी मेहनत की फसल को बचाने के लिए न्यायसंगत समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।
खालिसपुर (Ghazipur) के किसानों की यह पुकार सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण अंचल की उस पीड़ा की आवाज है, जहां आवारा पशु खेती-किसानी के लिए सबसे बड़ा संकट बन चुके हैं। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब और कितना ठोस कदम उठाता है।

