Mau: कानपुर की ‘ठाकुर हूं मैं’ डायलॉग से चर्चा में आई आस्था सिंह के बाद अब मऊ के पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में राजेश सिंह एक RPF जवान को धमकी देते हुए कहते हैं—“आंखें निकाल लूंगा।” यह दृश्य केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में गहराई तक पैठ चुके अहंकार की बीमारी का जीवंत उदाहरण है। जिस भाषा और तेवर में यह अधिकारी बोलता दिख रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
पद की गरिमा बनाम व्यक्तिगत अहंकार
लोक सेवक का धर्म जनता की सेवा और संयम बनाए रखना होता है। लेकिन वीडियो में राजेश सिंह जिस तरह “मैं तुम्हारा बाप हूँ” और “औकात में रहो” जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहा है, वह स्पष्ट करता है कि उसके लिए पद सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि दूसरों को नीचा दिखाने का औजार बन चुका है। जब जिम्मेदार पद (Mau) पर बैठा व्यक्ति खुलेआम कानून और मर्यादा को ताक पर रखकर गुंडागर्दी की भाषा बोलने लगे, तो आम नागरिक का तंत्र पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है।
Mau: वर्दी और विभाग का दुरुपयोग
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकारी अपनी धौंस जमाने के लिए RPF जैसे अनुशासित बल का नाम लेकर अभद्र धमकियां दे रहा है। सवाल यह है कि क्या सरकारी विभाग और सुरक्षा बल किसी अधिकारी की निजी जागीर हैं? इस तरह की बयानबाजी न केवल विभाग की छवि धूमिल करती है, बल्कि उन ईमानदार कर्मियों का भी मनोबल तोड़ती है जो दिन-रात नियम और कायदे से काम करते हैं।
अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद जांच के नाम पर औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं। लेकिन क्या सिर्फ निलंबन या तबादला काफी है? जब तक ऐसे ‘मानसिक रूप से अनियंत्रित’ और ‘अहंकारी’ अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम आदमी सरकारी दफ्तरों में प्रताड़ित होता रहेगा।
मऊ (Mau) की यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। लोक सेवक को यह समझना होगा कि जनता ही जनार्दन है और उनके वेतन का भुगतान उसी जनता के टैक्स से होता है। यदि रक्षक ही भक्षक की भाषा बोलने लगेंगे, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी। उम्मीद है कि उच्च अधिकारी इस वीडियो का संज्ञान लेकर ऐसी नजीर पेश करेंगे जिससे भविष्य में कोई भी अधिकारी अपनी मर्यादा लांघने से पहले सौ बार सोचे।

