TET की अनिवार्यता को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुरे देश के शिक्षकों में आक्रोश नजर आ रहा है। इसी कड़ी में वाराणसी में भी शिक्षकों का जमकर प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी संख्या में परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने सड़क पर उताकर अपना आक्रोश व्यक्त किया और कोर्ट के आदेश के खिलाफ नारेबाजी भी की।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने TET से संबंधित एक आदेश पारित किया, जिसमें टेट की परीक्षा पास करना सभी शिक्षकों को अनिवार्य किया गया था। अब कोर्ट के इसी फैसले को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में वाराणसी में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले गुरूवार को बड़ी संख्या में शिक्षक व शिक्षिकाएं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। वहां से हाथों में बैनर व तख्तियां लिए पैदल मार्च निकाला, जो वाराणसी जिला मुख्यालय तक गया। रास्तेभर शिक्षक-शिक्षिकाओं ने काला कानून वापस लो।।जैसे जमकर नारे लगाये।

TET के फैसले के विरोध में सौंपा ज्ञापन
इस प्रदर्शन की अगुवाई उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय व उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष कैलाश नाथ यादव ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात नजर आया ताकि किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना ना घटित होने पाए। सभी परिस्थितियों को नियंत्रित में किया जा सके।

इस दौरान शिक्षकों द्वारा एक ज्ञापन भी सौंपा गया। इस ज्ञापन के जरिए उन्होंने यह मांगरखी कि सरकार आरटीई के अधिनियम 2017 में संशोधन करें और वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को TET/CTET की अनिवार्यता से मुक्त करे। उन्होंने यह भी कहा कि अपने आदेश पर कोर्ट पुनर्विचार याचिका की मजबूती पेश कर शिक्षकों को इससे निजात दिलाये, क्योंकि अपनी सेवा के स्वर्णिम 15-30 वर्ष देने के बाद आज 50-55 वर्ष की उम्र में टीईटी/सीटीईटी की परीक्षा पास करने की अनिवार्यता न सिर्फ असंगत बल्कि अत्यावहारिक भी है। है।

