Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में बहुचर्चित शराब नीति मामले को लेकर बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। शुक्रवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जुड़े केस में बरी कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके।
अदालत के आदेश में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में असफल रहा। बहुचर्चित दिल्ली (Delhi News) शराब नीति को लेकर जिस कथित घोटाले की चर्चा लंबे समय से राजनीतिक और मीडिया गलियारों में होती रही, उसे लेकर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इस फैसले के साथ ही वह कानूनी अध्याय फिलहाल बंद हो गया, जिसने दिल्ली की सियासत को महीनों तक गरमाए रखा।
भावुक हुए केजरीवाल
फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए अरविंद केजरीवाल की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “हम शुरू से कहते आ रहे थे कि हम भ्रष्ट नहीं हैं। आज अदालत (Delhi News) ने भी यही कहा। सच की ही जीत होती है… आज सत्य की जीत हुई है। भगवान हमारे साथ हैं।”
उनकी आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं। उन्होंने कहा कि लगातार ‘शराब घोटाला’ कहकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई, लेकिन न्यायपालिका ने तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
New Delhi: राजनीतिक साजिश का आरोप
केजरीवाल ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में उनकी पार्टी के शीर्ष नेताओं को टारगेट किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक “बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र” था, जिसके तहत उनकी पार्टी के चार बड़े नेताओं को जेल भेजा गया। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अदालत (Delhi News) का फैसला इस बात का प्रमाण है कि आरोप निराधार थे।
समर्थकों में जश्न का माहौल
फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में राहत और उत्साह का माहौल देखा गया। कई जगहों पर मिठाइयां बांटी गईं और नारे लगाए गए। पार्टी नेताओं ने इसे “न्याय की जीत” करार दिया। मनीष सिसोदिया ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज वही भरोसा मजबूत हुआ है।
दिल्ली (Delhi News) शराब नीति का मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील रहा है। इस केस ने दिल्ली की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई, संसद से लेकर सड़क तक बहस छिड़ी रही।

