Varanasi: पुरे देश में तो होली का महापर्व चार मार्च को मनाया जाएगा लेकिन धर्म की नगरी काशी में इसकी शुरुआत अभी से ही हो चुकी है। हरिश्चंद्र घाट पर शुक्रवार को वो मंजर देखने को मिला जिसकी कल्पना लोग आम जीवन में कर नहीं सकते। प्रतीकात्मक रूप में बाबा के भूत प्रेत और अन्य गण नाचते झूमते नजर आए। क्योंकि ये मौका रहा काशी के हरिश्चंद्र घाट पर खेले जाने वाली मसाने की होली का। घाट पर इस चिता भस्म की होली शुरू होने से पहले बाबा कीनाराम से एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। विभिन्न रूपों में लोग बाबा की भक्ति और होली के रंग में रंगे नजर आए।

शोभायात्रा में देखने को अद्भुत दृश्य
शोभा यात्रा में शामिल लोग एक दूसरे पर जमकर अबीर गुलाल उड़ाते नजर आए। बाबा कीनाराम धाम से निकली भव्य शोभायात्रा वाराणसी (Varanasi) के हरिश्चंद्र घाट पहुंची, जिसमें साधु-संत, श्रद्धालु और भूत-पिशाच की वेशभूषा में सजे कलाकार शामिल हुए। कई श्रद्धालु अघोर वेश में पहुंचे – शरीर पर चिता भस्म लपेटे, गले में नरमुंड की माला और सर्प लटकाए हुए। डीजे पर बज रहे अवधूत भजनों और शिव भजनों पर लोग नाचते-झूमते दिखे। कलाकार मशाल, त्रिशूल और डमरू लेकर करतब दिखा रहे हैं, जबकि कुछ बाबा महाकाल और माता पार्वती के वेष में नृत्य करते दिखे।

Varanasi: वातावरण पूरी तरह से शिवमय
शोभायात्रा के हरिश्चंद्र घाट पहुंचने पर बाबा मसाननाथ का विधिवत अभिषेक और आरती किया गया। इसके बाद भस्म की होली शुरू हुई। इस होली को देखने और खेलने देश विदेश के कोने कोने से लोग पहुंचे है। हरिश्चंद्र घाट पर अघोरी, तांत्रिक और किन्नर जलती चिताओं के बीच चिता की राख से होली खेलते नजर आए। गले में नरमुंड की माला, हाथों में कपाल और ‘खेले मसाने में होली दिगम्बर’ के जयघोष के साथ वातावरण पूरी तरह शिवमय (Varanasi) हो गया। जब भस्म उड़ी तो श्मशान का मातम भी कुछ देर के लिए उत्सव में बदलता दिखा।

गौरतलब है कि देशभर से हजारों श्रद्धालु और बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक इस रहस्यमयी और आध्यात्मिक होली को देखने काशी पहुंचे हैं। घाट परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रहा है। घोरपीठ के पीठाधीश्वर कपाली बाबा (काले कपड़ों में) भी घाट पर पहुंचे और वे श्रद्धालुओं के साथ चिता भस्म से होली खेले।

इसके बारे में बताते हुए आयोजन कमेटी में शामिल डोमराज पंकज ने बताया कि मसाने की होली विश्व विख्यात है। पहले ये होली तांत्रिकों, औघड़ों द्वारा खेला जाता था। अब इस होली में काशीवासियों के साथ देश भर के लोग होली खेलते नजर आए।

पारंपरिक साक्ष्यों के अनुसार, मसाने की होली की शुरुआत करीब 350 साल पहले बाबा कालभैरव के तत्कालीन पीठाधिपति अघोरी उमानाथ, बाबा कीनाराम महाराज के प्रधान शिष्य बाबा बीजाराम और नाथ परंपरा के प्रसिद्ध संत योगी दीनानाथ के संयोजन में हुई थी। यह होली (Varanasi) संसार की नश्वरता, विरक्ति और भगवान शिव की महिमा की याद दिलाती है। सुरक्षा के मद्देनजर घाट पर भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधा और चिकित्सा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

