Varanasi: पवित्र गंगा में नाव पर हुई एक इफ्तार पार्टी तब विवाद का रूप ले लिया, जब वहां चिकन बिरयानी परोसे जाने और उसके अंश गंगा नदी में फेंके जाने की बात सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ आस्था को आहत किया, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी सवाल खड़े कर दिए। जिस घटना को कुछ मुस्लिम युवकों ने सोशल मीडिया पर दिखाने के लिए अंजाम दिया, वही अब उनके लिए भारी पड़ गई है।
अदालत में पेशी के दौरान वही मुस्लिम युवक फूट-फूटकर रोते नजर आए, रिहाई की गुहार लगाते रहे, लेकिन अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। इस पूरे मामले ने न केवल कानून व्यवस्था, बल्कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं पर भी बहस छेड़ दी है।

गुरुवार रात करीब आठ बजे 14 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। उनके परिवारों ने जमानत की याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पांच आरोपी अदालत में ही रो पड़े और जज के सामने कान पकड़कर माफी मांगते हुए रिहाई की भीख मांगने लगे। बावजूद इसके अदालत (Varanasi) ने सभी की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी। इस बीच सभी आरोपियों की ईद जेल में ही मनेगी। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी पुलिस बल तैनात रहा।
पुलिस का दावा: नाव हाईजैक कर कराई गई पार्टी
पुलिस ने अदालत में जो जानकारी दी, उसने मामले को और गंभीर बना दिया। कोतवाली थाना प्रभारी दयाशंकर सिंह के अनुसार, इन युवकों ने नाव और नाविक को जबरन कब्जे में लेकर गंगा के बीच इफ्तार पार्टी की थी। नाविक (Varanasi) के मना करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। कोतवाली थाना प्रभारी ने इसे नाव हाईजैक करने और नाविक के अपहरण जैसा गंभीर अपराध बताया। साथ ही कहा गया कि इस पूरी घटना के फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना उनकी ‘दिलेरी’ दिखाने की कोशिश थी।

कोतवाली पुलिस ने कोर्ट में यह भी बताया कि आरोपियों ने नाविक को धमकाकर बीच गंगा में नाव चलवाई। पार्टी के दौरान भी नाविक ने विरोध किया, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। वीडियो बनाने के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि वीडियो में पहले मस्जिद को दिखाया गया, फिर गंगा के दृश्य और उसके बाद नाव प(Varanasi) र सजे दस्तरखान को कई एंगल से शूट किया गया। बिरयानी और अन्य खाने के अलग-अलग वीडियो बनाए गए, जिससे यह संदेश देने की कोशिश थी कि वे प्रभावशाली हैं।
Varanasi: नई धाराएं जोड़ने की मांग
नाविक के बयान और घाट पर मौजूद चश्मदीदों के आधार पर पुलिस ने कोर्ट में पर्चा दाखिल किया है। इसके साथ ही आरोपियों (Varanasi) के खिलाफ अपहरण समेत कई नई धाराएं जोड़ने की अपील भी की गई है। पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ एक इफ्तार पार्टी नहीं थी, बल्कि कानून और व्यवस्था को चुनौती देने जैसा कृत्य था।
गौरतलब है कि इन सभी आरोपियों को 16 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें एसीपी कोर्ट (Varanasi) में पेश किया गया था, जहां से भी उन्हें जमानत नहीं मिली और जेल भेज दिया गया था। अब सीजेएम कोर्ट से भी राहत न मिलने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला सोमवार, 16 मार्च को सामने आया था, जब गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई। इस दौरान रोजेदारों को फल, मेवे और चिकन बिरयानी परोसी गई थी। पूरी पार्टी (Varanasi) का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, हिंदूवादी संगठनों की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया।

वीडियो में बिरयानी परोसे जाने की बात सामने आते ही भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत दर्ज (Varanasi) होने के महज आठ घंटे के भीतर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया।
इफ्तार पार्टी में शामिल सभी युवक मदनपुरा इलाके के ताड़तल्ला के रहने वाले हैं। इनमें कई युवक एक ही परिवार से जुड़े हैं और बाबू बीड़ी वाले के नाम से मशहूर घराने से आते हैं। आरोपियों में मोहम्मद अव्वल, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद, नूर इस्लाम और मोहम्मद फैजान एक ही घर के सदस्य हैं। इनके साथ आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, महफूज आलम, नेहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ, आमिर कैफी, मोहम्मद अनस और दानिश सैफी भी शामिल थे। सभी की उम्र 19 से 25 साल के बीच बताई गई है।

