चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की शुरुआत के साथ ही आस्था, श्रद्धा और भक्ति का माहौल पूरे देश में देखने को मिल रहा है। खासतौर पर पूर्वांचल-यानी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार-में इस पर्व का विशेष महत्व है। यहां नवरात्रि में देवी शक्ति के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। जो भक्त मां गौरी की आराधना करते हैं, उन्हें ‘गौरी भक्त’ या ‘गौरी उपासक’ कहा जाता है। वहीं चौथे दिन वाराणसी में मां श्रृंगार गौरी के पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।

काशी के ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर के कपाट वर्ष में केवल एक बार नवरात्रि की चतुर्थी तिथि को खोले जाते हैं। इस दिन दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस दिन मां का दर्शन और पूजन करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक सौभाग्य और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Chaitra Navratri: कौन हैं श्रृंगार गौरी?
श्रृंगार गौरी (Chaitra Navratri) मां पार्वती का ही एक दिव्य स्वरूप हैं, जिन्हें सौभाग्य, सुहाग और श्रृंगार की देवी माना जाता है। विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए मां का पूजन करती हैं। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखती हैं।
काशी में कैसे प्रकट हुईं श्रृंगार गौरी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए काशी में कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि इसी तप के दौरान उन्होंने श्रृंगार करके भगवान शिव को प्रसन्न किया, जिसके बाद उन्हें ‘श्रृंगार गौरी’ के रूप में पूजा जाने लगा।
एक अन्य मान्यता यह भी है कि माता स्वयं इस स्थान पर विराजमान हुईं, इसलिए इसे स्वयंभू स्वरूप माना जाता है। प्राचीन काल से यह स्थान काशी की धार्मिक (Chaitra Navratri) परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जहां देवी शक्ति का विशेष वास माना जाता है।
ज्ञानवापी परिसर में आस्था का केंद्र
श्रृंगार गौरी का यह मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध ज्ञानवापी परिसर में स्थित है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के पास आता है। यह स्थान ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

चतुर्थी के दिन यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीमित समय के लिए दर्शन कराए जाते हैं। महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार के साथ पहुंचकर मां को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और वस्त्र अर्पित करती हैं।
पूजन की परंपरा और मान्यता
इस दिन विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं मां श्रृंगार गौरी (Chaitra Navratri) का पूजन करती हैं। वे मां को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित कर अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से मां सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और जीवन में खुशहाली लाती हैं।
साल में एक बार होने वाला यह पूजन काशीवासियों के लिए बेहद खास होता है।यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और विश्वास का प्रतीक है।

