Varanasi: गौरा ऊपरवार रोड स्थित हनुमान मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और पूरा क्षेत्र “हरि नाम” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा पंडाल में भक्त पूरे मनोयोग से कथा श्रवण करते नजर आए।
मिला वैराग्य का संदेश
कथा वाचक कृष्णा शरण महाराज ने अपने सहज और मधुर प्रवचन में सुखदेव जी के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि सुखदेव जी जन्म से ही ज्ञानी और विरक्त थे, जिन्होंने सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर भक्ति और ज्ञान का मार्ग अपनाया। उनके जीवन से मनुष्य को त्याग, साधना और सच्चे ज्ञान की प्रेरणा मिलती है।
परीक्षित श्राप प्रसंग से संयम का पाठ
इसके बाद राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि द्वारा दिए गए श्राप का प्रसंग सुनाया गया। महाराज (Varanasi) ने कहा कि क्रोध और अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं, इसलिए जीवन में धैर्य और संयम बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। सुखदेव जी द्वारा परीक्षित को दिए गए उपदेशों के माध्यम से मानव जीवन के महत्व और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
Varanasi:सती चरित्र सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
कथा के दौरान सृष्टि की उत्पत्ति, मनु-शतरूपा के वंश का वर्णन और सती माता के त्याग व सम्मान से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इन प्रसंगों को सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु (Varanasi) भावुक हो उठे और कई लोग भक्ति में डूबे नजर आए।
कथा के अंत में यजमान द्वारा विधि-विधान से आरती की गई और प्रसाद का वितरण हुआ। पूरे समय श्रद्धालु (Varanasi) भक्ति में लीन होकर कथा का आनंद लेते रहे। भक्ति और आस्था से सराबोर यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन मूल्यों की सीख लेकर आया।
इस अवसर पर भोलानाथ उपाध्याय, शरद उपाध्याय, अतुल चतुर्वेदी, प्रदीप सोनी, अजय गुप्ता, अंतिम उपाध्याय, मोहित चौबे, दिलीप सेठ, मुकेश गुप्ता, शिवम चतुर्वेदी, अर्जुन गुप्ता, मुक्ति मौर्य सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

