रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और संसद Brijbhushan Singh को महिला पहलवानो के यौन शोषण मामले से दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया हैं। सबूतों के अभाव के कारण कोर्ट से उन्हें यह राहत मिली है। बृजभूषण सिंह के साथ उनके पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत का कहना हैं कि अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन) की ओर से पेश किए गए सबूत आरोप को साबित करने के लिए काफी नहीं हैं।
बता दें कि 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर साक्षी मालिक, विनेश फौगाट, बजरंग पुनिया सहित कई पहलवान शामिल थे। यह मामला लगभग 3.5 साल तक कोर्ट में चला। कोर्ट से बरी मिलने के बाद बृजभूषण सिंह ने कहा कि उन्होंने तो पहले ही कहा था कि उनके ऊपर लगाए आरोप बेबुनियाद हैं।
Brijbhushan Singh का यह रहा कहना
आदालत के फैसले पर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण सिंह (Brijbhushan Singh) ने कहा कि उन्होंने पहले जो कहा था, वही अब सही साबित हुआ है। “आज कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी किया है। मैंने उस दिन कहा था कि मैं स्वत: फांसी से लटक जाऊंगा। मगर आज मैं बाइज्जत बरी हो गया।”
जानिए क्या हैं पूरा मामला
यह मामला जनवरी 2023 का है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Singh) के खिलाफ पहलवानों ने आदोंलन की शुरुआत की थी। साक्षी मालिक, विनेश फौगाट, बजरंग पुनिया जैसे ओलिम्पिक पदक विजेताओं सहित कई पहलवानो ने मिलकर उनके खिलाफ धरना प्रदर्शन किया था। छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए थे।
इसी मामले को लेकर सभी पहलवानों ने संसद तक मार्च भी किया था, जिसके चलते उनको हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक कोर्ट में चला, बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Singh) 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे।
9 जून 2026 को इस मामले के ऊपर कोर्ट में अंतिम बहस शुरू हुई, जो 2 जुलाई को पूरी हुई। इसी पर 3 अगस्त 2026 को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए बृजभूषण सिंह को बरी किया।
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वहीं पूर्व ओलंपियन विनेश फौगाट ने कोर्ट के इस फैसले निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के एक शक्तिशाली नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराना और लड़ाई लड़ना आसान नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Singh) ने महिला पहलवानों को डराया और सरकार व पूरा तंत्र उन्हें बचाने में लगा था। महिला पहलवान इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी और उनकी कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

