Varanasi: वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर रोज़ा इफ्तार किए जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में जहाँ पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, तो वहीं दूसरी तरह खुद अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने भी कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे निंदनीय कृत्य बताया है।
एसएम. यासीन ने बयान जारी कर कहा कि इफ्तार इस्लाम में एक पवित्र धार्मिक प्रक्रिया है और इसे किसी सैर-सपाटे या पिकनिक की तरह नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि रोज़ा खोलने के बाद तुरंत मग़रिब की नमाज़ (Varanasi) अदा करना जरूरी होता है, इसलिए इस तरह के कृत्य से धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन होता है।
Varanasi: अपने घर और समाज से क्या मिली है तालीम
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ इस्लाम की परंपराओं के खिलाफ हैं, बल्कि इससे मजहब की छवि भी प्रभावित होती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कृत्य करने वालों को अपने घर और समाज से क्या तालीम मिली है। एस।एम। यासीन ने उम्मीद जताई कि इस मामले पर इस्लामी विद्वान और आलिम भी अपनी राय सामने रखेंगे, ताकि समाज में सही संदेश पहुंच सके।
उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज (Varanasi) की गई है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से समाज में अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं और कुछ राजनीतिक दलों तथा उनके कार्यकर्ताओं को मुद्दा बनाने का मौका मिल जाता है।
गौरतलब है कि वाराणसी के एक युवक रोजेदार ने सोमवार की शाम इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। बजड़े को बुक किया और गंगा घाट (Varanasi) पर रोजेदारों को बुलाया। पहले महफ़िल सजाई गई फिर नाव पर ही रोजेदारों ने नमाज पढ़ी फिर खजूर और फल खाकर अपना-अपना रोजा खोला। इसके बाद नाव पर बिरयानी समेत अन्य खानपान की सामग्री परोसी गई।
इफ्तारी करते इसका लुफ्त उठाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो भी अपलोड कर दिया। वीडियो जारी होते ही और मामला सामने आने के बाद बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों ने इसे आस्था पर ठेस बताते हुए आक्रोश जताया और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी की है। अब नाव पर रोज़ा इफ्तार करने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
