पर्यटन नगरी वाराणसी (Varanasi) को जल्द ही एक और हरित पर्यटन स्थल मिलने जा रहा है। सारनाथ से सटे उंदी गांव में ‘गौतमबुद्ध इको पार्क’ के निर्माण को शासन से हरी झंडी मिल गई है। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए 12.49 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की स्वीकृति के बाद वाराणसी (Varanasi) विकास प्राधिकरण (वीडीए) को परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इको पार्क न सिर्फ शहर को एक नया ग्रीन स्पेस देगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
जिलाधिकारी (Varanasi) सत्येंद्र कुमार ने बताया कि परियोजना पर लगभग 24.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पहली किस्त के रूप में 12.49 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं, जिससे प्रारंभिक निर्माण कार्यों को गति मिलेगी। सारनाथ के ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व को देखते हुए इस पार्क को पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाने की तैयारी है।
Varanasi:पर्यावरण और पर्यटन का संगम
प्रस्तावित इको पार्क में देसी प्रजातियों के वृक्षों और औषधीय पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। कृत्रिम झील और तालाब विकसित कर प्राकृतिक वातावरण का अनुभव कराया जाएगा। यहां वॉकिंग और जॉगिंग ट्रैक, साइक्लिंग ट्रैक, ओपन जिम, योग एवं ध्यान स्थल जैसी सुविधाएं होंगी। बच्चों के लिए अलग प्ले एरिया और आगंतुकों के लिए बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी।
पार्क (Varanasi) को प्लास्टिक-फ्री जोन बनाया जाएगा और सोलर लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी, जिससे यह पर्यावरण अनुकूल मॉडल के रूप में विकसित हो सके। सेल्फी प्वाइंट और थीम आधारित हरित सज्जा इसे युवाओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना सकती है।
गुणवत्ता और समय सीमा पर रहेगा जोर
शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी तकनीकी स्वीकृतियां ली जाएं और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित कार्य में ही किया जाएगा और तय समयसीमा में परियोजना पूरी करने की जिम्मेदारी वीडीए की होगी।
सारनाथ (Varanasi) की बौद्ध विरासत और प्राकृतिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए इस इको पार्क को विकसित किया जा रहा है। उम्मीद है कि इसके तैयार होने के बाद वाराणसी को एक नया ‘ग्रीन डेस्टिनेशन’ मिलेगा, जहां पर्यटक इतिहास और प्रकृति का संगम एक साथ महसूस कर सकेंगे।

