Varanasi: माघ मेले में स्नान को लेकर हालिया विवादों के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा प्रहार किया है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘कालनेमि’ की संज्ञा देते हुए कहा कि जो व्यक्ति नाम, वेशभूषा और आचरण में एकरूप न हो, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
शंकराचार्य (Varanasi) ने कहा कि जब किसी सरकार की कार्यशैली पर उसके ही सहयोगी सवाल उठाने लगें तो स्थिति गंभीर हो जाती है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के अधीन कार्य कर रहे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक की ओर से उठ रहे प्रश्न उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न हैं। ऐसे में, उनके अनुसार, मुख्यमंत्री को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रह जाता।
बटुक सम्मान कार्यक्रम पर भी उठाए सवाल
शंकराचार्य ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों के सम्मान कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम सतही तौर पर उचित दिख सकता है, लेकिन प्रयागराज में बटुकों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार के मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनके अनुसार, यह सम्मान कार्यक्रम कहीं न कहीं पार्टी की छवि सुधारने का प्रयास प्रतीत होता है।
‘गाय को राज्य माता’ का अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री को गाय को राज्य माता का दर्जा देने के लिए दिए गए 40 दिन के अल्टीमेटम का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य (Varanasi) ने कहा कि 20 दिन बीत चुके हैं और 20 दिन शेष हैं। यदि निर्धारित समयसीमा में मांग पूरी नहीं हुई तो वे देशभर के धर्माचार्यों के साथ लखनऊ कूच करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन की अपील भी की।
Varanasi: बीफ व्यापार और गौहत्या पर टिप्पणी
उन्होंने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के संदर्भ में आरोप लगाया कि इसके तहत बीफ व्यापार (Varanasi) को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की तुलना में पश्चिम बंगाल में गौहत्या की घटनाएं कम हैं। हालांकि, इन दावों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भाजपा पदाधिकारियों के संपर्क का दावा
शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि प्रदेश में भाजपा के कई जिला स्तरीय पदाधिकारी उनसे मुलाकात कर चुके हैं। उनके अनुसार, इन पदाधिकारियों ने पार्टी में असहजता जताते हुए ‘सनातन धर्म की रक्षा’ के लिए आगे आने की इच्छा (Varanasi) व्यक्त की है।
