Varanasi: ईंट भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल एक बार फिर शुरू हो गई है। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सामाजिक शिक्षण केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया गया है। वाराणसी जनपद के चोलापुर और आराजीलाइन विकासखंड में अलग-अलग 11 ईंट भट्ठों पर ये केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
300 बच्चे होंगे शिक्षा से लाभान्वित
इनके माध्यम से करीब 300 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।दरअसल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर परिवार के साथ ईंट भट्ठों पर काम करने आते हैं। इन परिवारों के बच्चे भी साल का अधिकांश समय भट्ठों पर ही बिताते हैं।

बार-बार स्थान बदलने और स्कूलों (Varanasi) से दूरी के कारण उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे बच्चों का भविष्य संवारने और उन्हें शिक्षा से जोड़े रखने के उद्देश्य से अस्थायी अनौपचारिक शिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इनके संचालन में ईंट भट्ठा संचालकों का भी सहयोग मिल रहा है।
Varanasi: श्रमिकों का भट्ठों पर पहुंचना शुरू
केंद्र के समन्वयक वल्लभाचार्य पांडेय ने बताया कि बिहार और झारखंड में दीपावली और छठ पर्व समाप्त होने के बाद प्रवासी श्रमिकों का भट्ठों पर पहुंचना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही कार्यकर्ता बच्चों (Varanasi) का सर्वेक्षण कर उन्हें आसपास के सरकारी विद्यालयों में नामांकित कराने का प्रयास करते हैं। स्कूल की अवधि समाप्त होने के बाद इन केंद्रों पर बच्चों को पढ़ाई के साथ विभिन्न शैक्षणिक और खेल गतिविधियों से जोड़ा जाता है।
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उन्होंने बताया कि केंद्रों पर आने वाले बच्चों को गर्म कपड़े, किताब, कॉपी और स्लेट भी उपलब्ध कराई जाती है। मानसून (Varanasi) शुरू होने पर प्रवासी मजदूरों की अपने घरों को वापसी होने लगती है। इसके बाद इन शिक्षण केंद्रों का संचालन भी करीब चार महीने के लिए बंद कर दिया जाता है।
