वाराणसी में यूजीसी रोलबैक (UGC Rollback) समेत कई अहम मुद्दों को लेकर मंगलवार को राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (R।A।M) के कार्यकर्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की और जिला मुख्यालय पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर सरकार के खिलाफ़ नारेबाजी की और सर्किट हाउस गेट से पदयात्रा कर जिला मुख्यालय तक गए। इस दौरान जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के नाम संबोधित ज्ञापन उनके प्रतिनिधि को सौंपा। जिसमें संगठन के द्वारा शिक्षा और कानून व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग उठाई गयी है।
UGC Rollback को लेकर सौंपा चार सूत्रीय मांगपत्र
कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ के पदाधिकारियों ने यूजीसी रोलबैक (UGC Rollback), आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, एससी/एसटी एक्ट में संशोधन/समाप्ति और पूरे देश में “एक बोर्ड, एक फीस और एक पाठ्यक्रम” लागू करने की मांग उठाई।

राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिला अध्यक्ष अजय कुमार तिवारी और जिला प्रभारी मानस कुमार पांडेय के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि मौजूदा नीतियों से सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है। इस दौरान नेताओं ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अब सिस्टम में बदलाव की बारी है।
सौंपे गए ज्ञापन में उठी मांगे
- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से संबंधित वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा करते हुए UGC एक्ट को समाप्त/निरस्त करने की मांग की गयी।
- वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर अर्थिक आधार पर आरक्षण समाज के हर कमजोर और जरूरतमंद परिवार को मिले।
- ST/SC ऐक्ट में जरूरी संशोधन किया जाए, जिससे वास्तविक पीड़ितों को प्रभावी कानूनी संरक्षण (UGC Rollback) मिलता रहे तथा कानून के संभावित दुरुपयोग को रोका जा सके।
- शिक्षा और रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित हो, सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में भर्ती तथा प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए।
अब सिस्टम में बदलाब की है बारी- कृष्णानंद पांडेय
पार्टी के पदाधिकारी कृष्णानंद पांडेय ने इस मुद्दे को लेकर स्वर्ण नेताओं की चुप्पी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “जब धृतराष्ट्र की सभा में द्रोपदी का चीरहरण हो रहा था, तब सिर्फ दो लोगों ने उसका विरोध किया था, एक विदुर और दूसरा विकर्ण ने और जिन्होंने चुप्पी साधी, उनका क्या हश्र हुआ, ये सब जानते हैं। अब सवर्ण समाज इस गूंगी-बहरी सरकार को बदलने का मन बना चुका है। सरकार में बदलाव बहुत ला चुके, अब सिस्टम में बदलाव की बारी है।”
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