Varanasi एक ऐसा शहर जहां आए दिन स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। लेकिन शहर के वायु की बात करें तो यह दिन-प्रतिदिन दूषित होगती जा रही है और उसका कारण भी सफाई व्यवस्था और ट्रैफिक मानी जा रही है। दरअसल, स्वच्छ वायू सर्वेक्षण-2026 में वाराणसी को 34वां स्थान मिला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसकी रैंकिंग जारी की है, जिसमें वाराणसी 48 48 शहरों में 34वें स्थान पर अपनी जगह बना पाया है। इसे इस बार महज 150 अंक हासिल हुए।
Varanasi का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन
बात अगर पिछले रिकॉर्ड की करें तो पिछले साल 2025 में वाराणसी (Varanasi) ने 11वें स्थान पर रैंकिंग हासिल की थी और इस बार वह सीधे-सीधे 23 पायदान नीचे खिसक गई। हालांकि शहर के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पायदान नीचे गिरने का सिलसिला पहले से ही धीरे-धीरे नीचे आ रहा था। वर्ष 2023 में वाराणसी तीसरे और 2024 में 9वें स्थान पर था। यानि कि इस बार 2026 की रैंकिंग में वाराणसी का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से किए जाने वाले सर्वेक्षण में शहरों के विभिन्न मानकों का मूल्यांकन किया जाता है। इन्ही मानकों में वाराणसी (Varanasi) खरा नहीं उतर सका। निर्माण कार्य के बाद सड़कों और अन्य हिस्सों को कच्चा नहीं छोड़ने की व्यवस्था में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन सड़कों की नियमित मशीन से सफाई अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नहीं होती सड़क सफाई नियमित तौर पर
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि मशीनों से सड़क सफाई नियमित तौर पर नहीं होती। कई बार वीआईपी मूवमेंट के दौरान ही प्रमुख सड़कों पर मशीनों से सफाई होती दिखाई देती है। सोचने वाली बात यह है कि वाराणसी एक ऐसा शहर (Varanasi) जहां आए दिन स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।
जिस शहर के मंत्री, विधायक, पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधि खुद हाथों में झाड़ू लेकर सड़क और गलियों की सफाई करते नजर आते है। लेकिन क्या उनके द्वारा किए गए ये तमाम सफाई के कार्य सिर्फ और सिर्फ कैमरे के सामने पोज़ देने के लिए किए जाते है। क्योंकि सर्वेक्षण में शहर की यह स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
इसके आलावा भी कुछ और कारण है जिनके वजह से यह माना जा रहा है कि शहर की रैकिंग खराब हुई है। शहर के कई क्षेत्रों में निर्माण सामग्रियों की दुकानें सड़क किनारे हैं और इन दुकानों के चलते बड़े बड़े वाहन वहां से रोजाना गुजरते हैं और धूल उड़ती है। इससे भी शहर का वायु प्रभवित होता है और प्रदुषण की संभावनाएं बढ़ जाती है।
कूड़ा डंपिंग पॉइंट बंद करना भी सर्वेक्षण के प्रमुख मानकों में शामिल है। नगर निगम का दावा है कि शहर में 20 से ज्यादा कूड़ा डंपिंग पॉइंट बंद किए गए हैं। इसके अलावा वाराणसी (Varanasi) में लगातार बढ़ता ट्रैफिक भी वायु गुणवत्ता के लिए चुनौती बना हुआ है। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर दिनभर वाहनों का दबाव और जाम की स्थिति रहती है। ऐसे में वाहनों की धीमी रफ्तार और लंबे समय तक चलने वाले ट्रैफिक से प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।
ये भी पढ़ें:- दिल्ली हादसे में रेणुकूट के अभिषेक की मौत, वाराणसी में अंतिम संस्कार
ऐसे में यह कहा जा सकता है कि लगातार चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों पर उड़ती धूल और भारी ट्रैफिक जाम वाराणसी (Varanasi) के इस खराब प्रदर्शन की प्रमुख वजह हो सकती हैं।
