Varanasi: काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भगवान गणेश की उपासना का विशेष महत्व है। प्रथम पूज्य भगवान गणेश के जन्म दिवस के पावन अवसर पर सोनारपुरा स्थित काशी खंडोक्त श्री श्री 1008 चिंतामणि गणेश मंदिर में सोमवार को भव्य हरियाली श्रृंगार एवं बर्फ बिहार झांकी का आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर को हरियाली, फूल-पत्तियों, फलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से आकर्षक ढंग से सजाया गय। भगवान चिंतामणि गणेश के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं भोर से देर रात तक पहुंचते हैं ।
मंदिर के महंत श्री चल्ला सुब्बाराव शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश (Varanasi) के जन्म दिवस के अवसर पर सोमवार सुबह आठ बजे से विशेष पूजन-अर्चन और भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद शाम छह बजे से श्रद्धालुओं को भगवान चिंतामणि गणेश के विशेष हरियाली श्रृंगार और बर्फ बिहार झांकी के दर्शन होंगे। झांकी को आकर्षक बनाने के लिए मंदिर परिसर में 101 बर्फ की सिल्लियां सजाई गई। बर्फ और हरियाली के बीच भगवान गणेश की झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

फूल-पत्तियों और फलों से सजाया गया मंदिर
आयोजन को लेकर मंदिर परिसर (Varanasi) को विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिर में रंग-बिरंगे हजारों फूल-पत्तियों के साथ गुब्बारों और विभिन्न प्रकार के फलों से सजावट की गई है। मंदिर परिसर का वातावरण हरियाली से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं के आने-जाने के मार्ग को भी बर्फ और हरियाली फूल-पत्तियों से सजाया गया। इससे मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों को भक्ति के साथ आकर्षक झांकी का भी अनुभव मिल रहा है।

भगवान गणेश (Varanasi) के विशेष श्रृंगार में हरियाली को प्रमुखता दी गई है। मंदिर परिसर में पान के पत्तों और हरियाली से की गई सजावट श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है। भगवान का विशेष हरियाली श्रृंगार कर उन्हें लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया।
51 किलो लड्डू और छप्पन भोग का लगाया गया भोग
भगवान चिंतामणि गणेश को इस अवसर पर 51 किलो लड्डुओं का भोग लगाया गया। इसके साथ ही छप्पन भोग भी अर्पित किया जाएगा। पूजन के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया जाएगा। (Varanasi) मंदिर में शाम को भजन संध्या का भी आयोजन होगा, जिसमें स्थानीय कलाकार भगवान गणेश के चरणों में भजनों की स्वरांजलि अर्पित करेंगे। भजन संध्या के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आएगा।

महंत श्री चल्ला सुब्बाराव शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। चिंतामणि गणेश के दर्शन-पूजन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान अपने भक्तों की चिंताओं का हरण करते हैं। वरद चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को दूर्वा, लड्डू और लावा अर्पित कर विधि-विधान से पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों को वांछित फल प्रदान करते हैं।
दर्शन के लिए उमड़ेगा श्रद्धालुओं का हुजूम
चिंतामणि गणेश मंदिर में विशेष श्रृंगार और झांकी के दर्शन के लिए (Varanasi) काशी के साथ ही आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मंदिर में पूजन-अर्चन का क्रम शुरू हो गया है। शाम को हरियाली श्रृंगार और बर्फ बिहार झांकी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ बढ़ेगी। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो रहा है।

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आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भगवान गणेश (Varanasi) का विशेष श्रृंगार किया गया है और बर्फ की सिल्लियों से झांकी को अंतिम रूप दिया गया है। मंदिर परिसर की हरियाली और फूलों से की गई सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है। गणेश जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालु भगवान चिंतामणि गणेश के दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगेंने पहुच रहे है।
