Varanasi: बरेका के केंद्रीय खेल मैदान में इस बार विजयादशमी का आयोजन कई मायनों में खास होने जा रहा है। दशहरे के दिन यहां 56 साल पुरानी परंपरा में बदलाव देखने को मिलेगा। वर्ष 1970 से लगातार दस सिर वाले रावण के पुतले का दहन होता रहा है, लेकिन इस बार पहली बार एक सिर वाले रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। नयापन लाने के उद्देश्य से रावण के पुतले की बनावट और उसके परिधान में बदलाव किया जा रहा है। रावण का पुतला 70 फीट ऊंचा होगा, जबकि अकेले उसका सिर करीब 20 फीट का होगा। इसके साथ ही 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं।

बरेका (Varanasi) में दशहरा समारोह को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पुतलों को अंतिम रूप देने के लिए कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। इस बार बारिश और मौसम को ध्यान में रखते हुए पुतलों की बनावट के साथ उनके परिधान में भी बदलाव किया गया है। करीब 350 मीटर रेशमी कपड़े से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के परिधान तैयार किए जा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि इससे बारिश की स्थिति में पुतलों को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
पुतले खड़े करने में होने वाली परेशानी को देखते हुए बदलाव
कारीगरों के अनुसार, हर साल दस सिर वाले रावण के विशाल पुतले को मैदान में खड़ा करने में काफी परेशानी होती थी। इसके अलावा बारिश होने पर पुतलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता था। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए इस बार पुतलों के स्वरूप और निर्माण शैली में बदलाव किया गया है। एक सिर वाले रावण का पुतला तैयार करने से निर्माण और उसे खड़ा करने की प्रक्रिया को भी पहले की अपेक्षा सुगम बनाने का प्रयास किया गया है।

पुतलों को दशहरे से करीब तीन दिन पहले (Varanasi) मैदान में खड़ा किया जाएगा, ताकि आयोजन के दिन किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न हो। निर्माण कार्य की निगरानी के साथ पुतलों को खड़ा करने और दहन की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
100 किलो तांत से तैयार हो रहे पुतले
रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के निर्माण में बड़ी मात्रा में सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। तीनों पुतलों को तैयार करने में करीब 150 पीस बांस, 25 लीटर रंग, 100 किलो तांत और 500 किलो गत्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब 10 कारीगर लगातार निर्माण कार्य में जुटे हैं। दिन-रात मेहनत कर कारीगर दशहरे से पहले पुतलों को पूरी तरह तैयार करने में लगे हैं।पुतलों के विशाल आकार को देखते हुए उनके ढांचे को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके बाद कपड़े और अन्य सजावटी सामग्री लगाकर उन्हें अंतिम स्वरूप दिया जाएगा।
Varanasi 20 अक्तूबर को होगा पुतला दहन
बरेका (Varanasi) में इस वर्ष विजयादशमी का मुख्य आयोजन 20 अक्तूबर को केंद्रीय खेल मैदान में होगा। कार्यक्रम की शुरुआत शाम करीब साढ़े चार बजे रूपक मंचन से होगी। इसके लिए कलाकार शाम चार बजे मैदान में पहुंचेंगे। करीब ढाई घंटे तक चलने वाले रूपक में राम वनगमन से लेकर रावण वध और पुतला दहन तक के प्रसंगों को मंचित किया जाएगा। रूपक समाप्त होने के बाद रात करीब साढ़े सात बजे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा।आयोजन को लेकर 18 अक्तूबर को केंद्रीय खेल मैदान (Varanasi) में पूरे कार्यक्रम का पूर्वाभ्यास भी किया जाएगा, जिससे दशहरे के दिन होने वाले कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके।
पांच दृश्यावलियों में दिखेगा राम से रावण वध तक का प्रसंग
दशहरा समारोह के प्रमुख आकर्षण रूपक की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं। बरेका संस्थान के सभागार में रूपक की तैयारियों को परखा गया। रूपक निदेशक एसडी सिंह की देखरेख में पांच दृश्यावलियों के माध्यम से राम वनगमन से लेकर रावण वध और पुतला दहन तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। इसमें संवादों के साथ गीतों को भी शामिल किया गया है।रूपक के दौरान रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया जाएगा। (Varanasi) कलाकारों की भूमिका, संवाद, गीत, मंच व्यवस्था और अन्य तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया जा रहा है, ताकि मुख्य आयोजन के दौरान किसी तरह की कमी न रह जाए।
आसपास के जिलों से भी पहुंचते हैं लोग
बरेका का दशहरा समारोह वाराणसी के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। यहां बरेका और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के साथ ही दूसरे जनपदों से भी बड़ी संख्या में लोग विजयादशमी का कार्यक्रम देखने (Varanasi) पहुंचते हैं। विशाल पुतलों का दहन और रामलीला के प्रसंग लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं। इस बार एक सिर वाले रावण का पुतला पहली बार तैयार किए जाने के कारण आयोजन को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता है।

रूपक निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि करीब ढाई घंटे चलने वाले रूपक के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। बरेका और आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूसरे जनपदों से भी बड़ी संख्या में लोग (Varanasi) कार्यक्रम देखने पहुंचते हैं।
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विजयादशमी समिति के महामंत्री अनूप सिंह वत्स ने बताया कि आयोजन में नयापन लाने के उद्देश्य से इस बार एक सिर वाले रावण के पुतले का निर्माण कराया जा रहा है। 56 वर्षों से चली आ रही परंपरा में यह बदलाव इस बार के दशहरा समारोह को खास बनाएगा।
