Varanasi: “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय…” यह कहावत रोहनिया थाना क्षेत्र में उस समय सच साबित हुई, जब जन्म के कुछ ही घंटों बाद एक नवजात शिशु को लोकलाज के भय से किसी ने खेत में मरने के लिए छोड़ दिया। ठंड और भूख से तड़पता मासूम जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था।

बताया जा रहा है कि नवजात को खेत में पड़े देख किसी स्थानीय व्यक्ति ने इसकी सूचना पुलिस (Varanasi) को दी। जानकारी मिलते ही रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह तत्काल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना समय गंवाए नवजात को अपने संरक्षण में लिया और इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंचाया।
समय पर अस्पताल पहुंचने और उपचार मिलने से मासूम की जान बच गई। अब उसकी हालत स्वस्थ बताई जा रही है। एक ओर जहां नवजात को जन्म के बाद इस तरह लावारिस छोड़ने वाले व्यक्ति के प्रति लोगों में आक्रोश है, वहीं पुलिस (Varanasi) की तत्परता की जमकर सराहना हो रही है।
Varanasi: ड्यूटी से आगे दिखी इंसानियत
थाना प्रभारी राजू सिंह ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ नवजात को अस्पताल पहुंचाया, उसने पुलिस की मानवीय भूमिका की मिसाल पेश की है। आमतौर पर पुलिस (Varanasi) की भूमिका कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण तक सीमित मानी जाती है, लेकिन इस मामले में एक असहाय नवजात के लिए पुलिसकर्मी ही उसकी जिंदगी बचाने वाला सहारा बन गया।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नवजात को खेत में छोड़ने वाले व्यक्ति ने भले ही इंसानियत को शर्मसार किया हो, लेकिन राजू सिंह जैसे पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता समाज में भरोसा और उम्मीद जगाती है।
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फिलहाल पुलिस नवजात को खेत में छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान और पूरे मामले की जांच में जुटी है। घटना ने जहां समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा किया है, वहीं पुलिस (Varanasi) की तत्परता ने यह संदेश भी दिया है कि सच्चा पुलिसकर्मी केवल अपराध रोकने वाला नहीं, जरूरत पड़ने पर जिंदगी बचाने वाला भी होता है।

