Varanasi: ठगी तो आपने बहुत देखी होगी लेकिन भोपाल और वाराणसी की रहनी वाली एक महिला का ऐसा मामला सामने आया हैं जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हम बात कर रहे हैं खुद को IAS और CBI अधिकारी बताकर सरकारी रुतबा दिखाने और लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है।
नाम तृप्ति सिंह राजपूत, आरोप है कि उसने फर्जी IAS अधिकारी बनकर मध्य प्रदेश में सरकारी प्रोटोकॉल का फायदा उठाया। उसने फोटो एडिटिंग और AI टूल्स की मदद से LBSNAA (लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी) की फर्जी तस्वीरें तैयार कीं और सोशल मीडिया पर खुद को 2019 बैच की IAS अधिकारी घोषित कर दिया।

फर्जी IAS प्रोटोकॉल का उठाया फायदा
बतादें कि तृप्ति ने अपने भाई सुधांशु के साथ मिलकर फर्जी अधिकारी होने का पूरा दिखावा तैयार किया। वहीं उसने एक गाड़ी खरीदी और उस पर बड़े अक्षरों में ‘भारत सरकार’ लिखवा दिया। इसके बाद वह मध्य प्रदेश में इसी गाड़ी से घूमने लगी।गौरतलब हैं कि महिला खुद को वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बताकर पुलिस थानों का निरीक्षण करने जाती थी। जिसमें स्थानीय पुलिस की ओर से उसे सरकारी प्रोटोकॉल और सुरक्षा भी मुहैया कराई जाती थी।
युवाओं से ठगे 9.80 लाख रुपये
आरोप है कि उसने खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का एडिशनल डायरेक्टर बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाया। साथ ही अशोकनगर के चंदेरी क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 9.80 लाख रुपये भी ऐंठ लिए।वहीं भोपाल के एक बिल्डर को भी होटल लीज पर दिलाने का भरोसा देकर 90 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है।
बिजनेसमैन से शादी
बताया जा रहा है कि IAS तृप्ति ने एक बड़े बिजनेसमैन से शादी भी की थी। हालांकि, शादी के बाद उसके काम करने के तरीके, कथित सरकारी बैठकों और बातचीत के लहजे को लेकर पति और ससुर को शक होने लगा। इसके बाद ससुराल वालों ने उसकी पहचान और सरकारी पद की जानकारी जुटानी शुरू की।इसी बीच चंदेरी में ठगी के शिकार बेरोजगार युवाओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। इसको लेकर IAS तृप्ति का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह सरकारी दफ्तर में अधिकारी की तरह रौब दिखाती हुए नजर आ रही हैं।
भाई समेत गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। चंदेरी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक हेरिटेज होटल से तृप्ति और उसके भाई सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि दोनों ने मिलकर फर्जी अधिकारी का पूरा नेटवर्क तैयार किया था।
ये भी पढ़े:- Karmabhoomi Express के चार डिब्बों में लगी आग
फ़िलहाल, यह मामला सरकारी पद और प्रोटोकॉल के नाम पर लोगों को गुमराह करने के साथ प्रशासनिक सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
