समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को डबल पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। गुरुवार को अदालत ने दोनों की 10 साल की सजा निलंबित करते हुए जमानत दे दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। ऐसे में अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है, जबकि आजम खान की रिहाई अन्य लंबित मामलों के कारण अटक सकती है।
Azam Khan के खिलाफ अन्य मामलों की स्थिति और उनमें जारी वारंट या हिरासत संबंधी आदेश यह तय करेंगे कि जमानत मिलने के बावजूद उन्हें जेल से रिहा किया जा सकेगा या नहीं।
Azam Khan की सजा बढ़ाकर 10 साल की गई थी
डबल पैन कार्ड मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 17 नवंबर 2025 को Azam Khan और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी।
इसके बाद अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दाखिल की। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 23 मई 2026 को अपीलीय अदालत ने Azam Khan की सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी थी, जबकि अब्दुल्ला की सजा में बदलाव नहीं किया गया था।
इस फैसले को चुनौती देते हुए Azam Khan ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उन्होंने दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहाई की मांग की थी। 15 अक्टूबर को सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आजम खान की रिहाई में क्यों आ सकती है अड़चन?
डबल पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बावजूद Azam Khan को तत्काल जेल से रिहाई मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनके खिलाफ अन्य मामलों में भी कानूनी कार्रवाई लंबित होने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला उत्तर प्रदेश विजिलेंस ने दर्ज किया है। यदि इन मामलों में गिरफ्तारी या हिरासत से संबंधित वैध आदेश प्रभावी हैं, तो डबल पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकती।
हालांकि, उनकी वास्तविक रिहाई की स्थिति संबंधित मामलों के अदालती रिकॉर्ड और जारी आदेशों पर निर्भर करेगी।
क्या है डबल पैन कार्ड मामला?
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला Azam Khan के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे।
आरोप के मुताबिक, एक पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनाव और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया गया।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
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हाईकोर्ट से जमानत और सजा निलंबन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले में दोषसिद्धि समाप्त हो गई है। अदालत ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किया है। इसका मतलब है कि दोषी ठहराए जाने का फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा, जबकि अपील के दौरान सजा के क्रियान्वयन पर राहत दी गई है।
