Mau: अजान की रूहानी आवाज और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच मऊ का ऐतिहासिक भरत मिलाप गुरुवार की सुबह सकुशल संपन्न हो गया। मुगलकाल से चली आ रही इस अनूठी परंपरा ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। शाही कटरा मस्जिद के मैदान में पूरी रात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। भगवान श्रीराम और भरत के मिलन के भावुक दृश्य के साथ ही जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
ताने-बाने की नगरी मऊ का यह भरत मिलाप अपनी ऐतिहासिक परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि मुगलकाल में बेगम जहांआरा भी शाही कटरा मस्जिद (Mau) में बैठकर इस आयोजन को देखा करती थीं। हिंदू और मुस्लिम समुदाय की साझा भागीदारी इस आयोजन को विशिष्ट बनाती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग रातभर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए जुटते हैं।
Mau: मस्जिद के गेट को स्पर्श करता है श्रीराम का विमान
भरत मिलाप की सबसे खास परंपरा भगवान श्रीराम के शाही विमान से जुड़ी है। शाही कटरा मस्जिद के मैदान में पहुंचने के बाद विमान मस्जिद (Mau) के गेट को तीन बार स्पर्श करता है। इसके बाद भगवान श्रीराम और भरत का मिलन होता है। इस परंपरागत दृश्य को देखने के लिए देर रात तक लोगों की भीड़ जुटी रही। सुबह अजान की आवाज और श्रीराम के जयघोष के बीच आयोजन का समापन हुआ तो पूरा परिसर श्रद्धा और उल्लास से गूंज उठा।
सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर तैनात रही फोर्स
शहर (Mau) की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। शाही कटरा मस्जिद के मैदान से लेकर आसपास के प्रमुख मार्गों तक पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। जिलाधिकारी आनंद वर्धन और पुलिस अधीक्षक सर्वेश कुमार मिश्रा समेत जिले के वरिष्ठ अधिकारी पूरी रात मुस्तैद रहे। आयोजन की सुरक्षा के लिए आरआरएफ, पीएसी और विभिन्न थानों की पुलिस सहित करीब सात हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
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प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था के बीच ऐतिहासिक भरत मिलाप शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। आस्था, परंपरा और आपसी सौहार्द का यह आयोजन एक बार फिर मऊ (Mau) की साझा सांस्कृतिक विरासत को सामने लाया।
