यह किताब मुंबई शहर के वर्तमान और अतीत को जानने के लिए किसी ख़ज़ाने से कम नहीं. इस किताब को सेतु प्रकाशन ने छापा है.
मुंबई के सांस्कृतिक इतिहास को समझने में विजय कुमार की किताब शहर जो खो गया हमारी चेतना में ज़ोरदार दस्तक देती है और हमें उस मुंबई में ले जाती है जिसे एक बार देखने की चाहत हर हिन्दुस्तानी अपनी सीने में संजोए रखता है. मुंबई शहर की विराटताओं, सूक्ष्मताओं, जटिलताओं और इस शहर में रहने वाले आम आदमियों, नाट्य- कर्मियों, सिने- जगत की हस्तियों, कलाकारों, चित्रकारों की मौजूदगी को बहुत गहराई से विजय कुमार महसूस करते हैं. किताब में कभी वे शहर के पाखंड को, शहर के सपनों को, शहर की सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं को, शहर की एशियाटिक लाइब्रेरी को, शहर के प्रोगस्वि आर्ट ग्रुप को, अपनी चेतना का हिस्सा बनाते हैं तो कभी इस्मत आपा, मंटो, कृश्न चंदर, राजेन्द्र सिंह बेदी को आत्मीयता से याद करते है, तो कभी शहर में बंद हुए सिनेमाघर, शहर की महफ़िलों को, मराठी संगीत को, ग्रामोफोन रिकार्ड के अतीत को अपनी स्मृति में संजोकर हमारे सामने पेश करते हैं. कभी वे मुंबई शहर की धारावी बस्ती में रहने वाले पुश्तैनी कारीगरों को याद करते हैं जिन्होंने सौ साल पहले यहां की दलदली जमीन को रहने लायक बनाया और बताते है धारावी की झोपड़पट्टियों में पाँच हजार औद्योगिक इकाइयां हैं और इस पर आज पूंजी निवेशकों की नज़र है क्योंकि यह झोपड़पट्टियों वाली यह बस्ती उनके लिए मेगा प्रोजेक्ट है, सोने की खदान है.
अपनी इस किताब में विजय कुमार अतीत में गुम हुए मुंबई के वाटसन होटल को याद करते हैं और यह बताना नहीं भूलते कि मशहूर अंग्रेज़ी लेखक मार्क ट्वेन ने होटल की बालकनी से शहर के कौओ को देखा था. इस किताब में विजय कुमार समन्दर से खींची गई ज़मीन पर बनाए गए बांद्रा कुर्ला काम्पलेक्स की भव्य इमारतों को अपनी संवेदना का हिस्सा बनाते हैं जिनके चारों तरफ कांच की दीवारें हैं जहां नयी कार्य- संस्कृति और नयी व्यवस्थाओं का आगाज़ होता है. उन कांच की दीवारों को देखकर उनके मन में सवाल आता है कि ‘क्या अब भी लोग पुराने रोमान में जीते हैं.
अपनी इस किताब में विजय कुमार मुंबई की साहित्यिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सिनेमाई विरासत को दर्ज करते है. यह किताब वाल्टर बेंजामिन के इस कथन का साक्ष्य प्रस्तुत करती है कि विकास के भी कुछ खंडहर है जहां स्मृतियां भटकती रहती है और कुछ विषाद।
sudha jaiswal

