वाराणसी | देश में इन दिनों मंदिरों में ड्रेस को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है, जैसे-जैसे दिन बीत रहे, वैसे वैसे इस मामले या यूं कहें कि इस विवाद ने तुल पकड़ना शुरू कर दिया है। बता दें कि मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किए जाने का बयान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (sant samiti) के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने दिया था। इसके बाद से यह विवाद शुरू हुआ लेकिन उनके इस बयान का तमाम संतो के द्वारा समर्थन भी किया जा रहा है। मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने का सर्मथन काशी के संतो ने तो किया ही लेकिन उनके साथ अखिल भारतीय संत समिति (Akhil Bharatiya Sant Samiti) ने भी इसका समर्थन किया है।
इस विवाद को लेकर अखिल भारतीय संत समिति (Akhil Bharatiya Sant Samiti) के महामंत्री स्वामी जितेंद्रान्द सरस्वती ने भी अपना बयान दिया है। उन्होंने भी मंदिरों में पुरुष और महिलाओं के ड्रेस कोड लागू होने का समर्थन करते हुए इसमें अपनी रजामंदी दर्ज की है।
Akhil Bharatiya Sant Samiti : स्वामी जितेंद्रान्द सरस्वती ने किया समर्थन
इस बयान का समर्थन करते हुए स्वामी जितेंद्रान्द सरस्वती ने कहा कि हमारे देश में कुछ ऐसे भी परिवार है जिनके यहां से लोग अर्धनग्न वस्त्र में ही अपने संतानों को मंदिर भेज देते हैं। आखिर देश के युवाओं को क्लब में बनाये गए नियम-कानून व ड्रेस कोड का पालन करने में कोई समस्या नहीं तो फिर मंदिरो के ड्रेस कोड का पालन करने में क्या असुविधा?
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी के द्वारा मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किए जान की बात हम सभी को एक राह दिखाई है। हमे पूर्ण विश्वास है कि देशभर के मंदिर जो महंत और विभिन्न अखाड़ों के द्वारा संचालित है, वहां एक सभ्य और सुसंगत ड्रेस पहनकर ही लड़के और लड़कियां प्रवेश करेंगे। यह सभी से अपेक्षा रहेगी।

