Varanasi: तीन महीने पहले शुरू हुआ छीतौना गांव का चर्चित विवाद अब हत्या में बदल गया है। 5 जुलाई को हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल छोटू राजभर (45 वर्ष) का शुक्रवार सुबह 91वें दिन बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान निधन हो गया। डॉक्टरों ने गहरे घावों में संक्रमण को मौत की वजह बताया। मौत की खबर मिलते ही गांव में कोहराम मच गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। एहतियातन गांव में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।
Varanasi: कैसे शुरू हुआ था विवाद?
5 जुलाई की सुबह खेत में गाय घुसने को लेकर ठाकुर और राजभर बिरादरी में झगड़ा हो गया था। देखते ही देखते मामला खूनी संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों ने लाठी-डंडों, तलवार और असलहे से एक-दूसरे पर हमला किया।

राजभर पक्ष का आरोप है कि संजय सिंह, अमित सिंह और अनुराग सिंह सहित कई लोग घर में घुसकर महिलाओं से छेड़छाड़ करने लगे और बीच-बचाव करने पर छोटू, भोला, राम गुलाम और सुरेंद्र पर जानलेवा हमला कर दिया। वहीं ठाकुर पक्ष ने भी पलटवार करते हुए आरोप (Varanasi) लगाया कि राजभर समाज ने उनके घर पर हमला किया और संजय सिंह व अन्य को बुरी तरह घायल किया।
घटना के बाद पुलिस ने तत्कालीन थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया था। अब तक इस मामले में अनुराग सिंह और अमित सिंह को जेल भेजा जा चुका है। गुरुवार को पुलिस ने कई महीनों से अस्पताल में भर्ती चल रहे तीसरे आरोपी संजय सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

यह मामला (Varanasi) शुरुआत से ही राजनीतिक रूप ले चुका था। काबीना मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर ने मामले की शिकायत डीजीपी से की थी, जिसके बाद पुलिस कमिश्नर ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाई थी। वहीं ठाकुर समाज ने भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन किया था। सोशल मीडिया पर इस विवाद ने जमकर तूल पकड़ा था और दोनों समाज आमने-सामने आ गए थे।
छोटू राजभर की मौत के बाद गांव में भारी तनाव है। पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना (Varanasi) को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।

