SIR: इस सर्द के मौसम में राजनितिक गलियारों को गर्माहट का एक नया साधन मिल गया है। क्योंकि SIR यानि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची का संशोधित मसौदा जारी कर दिया गया है। अब इस ड्राफ्ट सूची के जारी होने के बाद से ही न सिर्फ आम जनता में बल्कि राजनितिक गलियारों में हलचल मच गई है। क्योंकि SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आई और मानो जैसे मतदाता नहीं, हवा में उड़ते नाम नजर आने लगे हों! वहीं पहली ही लिस्ट ने बीजेपी की नींद उड़ा दी है क्योंकि जहाँ पुरे यूपी में मतदाता सूची से 2।89 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं।
कैंट क्षेत्र के वोटरों के कटे सबसे ज्यादा नाम
वहीं सिर्फ अकेले पीएम मोदी के गढ़ वाराणसी में ही 18% वोटर्स (SIR) गायब हो गए हैं। पीएम के संसदीय क्षेत्र में 5.73 लाख वोटर्स के नाम कट गए हैं और इनमे सबसे ज्यादा वोट जिन विधानसभा से कटे हैं वो है कैंट और शहर उत्तरी विधानसभा, जो कि शहर का महतवपूर्ण क्षेत्र होने के साथ-साथ बीजेपी के लिए राजनितिक दृष्टी से भी बेहद महतवपूर्ण माना जाता है, ये क्षेत्र बीजेपी के गढ़ कहे जाते हैं और यही से ही वोटर्स ऐसे गायब हुए हैं मानों विधायकों के लिए खतरे की घंटी बज गई हो।
2.89 करोड़ मतदाताओं का सूचि से नाम बहार
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि घबराइए मत, ये तो बस ड्राफ्ट (SIR) है। नाम नहीं है? तो 6 फरवरी तक फॉर्म-6 भरिए, कागज़ लगाइए और फिर इंतज़ार कीजिए। अंतिम फैसला 6 मार्च को आएगा। लेकिन असली ट्विस्ट यहीं आता है कि जिसका नाम बाद में भी नहीं जुड़ा वो घुसपैठिया है या नहीं ये बाद में तय होगा। मतलब, पहले नाम काटो फिर पूछो कि“आप हैं कौन?”
सोचने वाली बात यह है कि ये वोटर्स किस पार्टी से थे लेकिन पार्टी चाहे जो हो वोटर्स का कम होना चिंता की लकीर ला ही देता है। वहीं पूरे यूपी की बात करें तो अब मतदाताओं की संख्या 12.55 करोड़ रह गई। मतलब, पहले जो 15.44 करोड़ मतदाता थे, उनमें से 2.89 करोड़ नाम सूची से बाहर। किसी की मौत दर्ज, कोई कहीं और शिफ्ट हो गया और कुछ के नाम तो डुप्लीकेट भी निकल आए। मतलब, पहचान तो वही लेकिन पता दो-दो! और वाराणसी में ड्राफ्ट लिस्ट के बाद इस वक़्त हर दूसरा शख्स यही पूछ रहा है कि मेरा वोट गया कहाँ?
प्रशासन ने 28 अक्टूबर को 31 लाख 53 हजार 705 मतदाता पर विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू किया था, जिसमें बीएलओ ने मतदाताओं की संख्या 25 लाख 80 हजार 502 की सूची जारी की। 6 जनवरी को जारी आंकड़े में कुल 573203 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं की संख्या का 18।18% है। ड्राफ्ट रोल में वाराणसी कैंट से 112384 जबकि वाराणसी उत्तरी से 111457 वोटरों के नाम कम हुए हैं।
बहुत कन्फ्यूजन है इस ड्राफ्ट लिस्ट के आने के बाद से।।लेकिन एक बात तो साफ़ है कि विपक्षियों ने इसपर अपनी राजनितिक रोटियों को सेंकना शुरू कर दिया गया है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पहले ही कह दिया था कि इस SIR की प्रक्रिया से सबसे ज्यादा खतरा भारतीय जनता पार्टी को ही होगा। इस हलचल और खलबली के बीच अब सोचने वाली बात यह है कि पीएम के संसदीय क्षेत्र में लाखों नाम कट जाना, कैंट और उत्तरी सीट का इतना प्रभावित होना, क्या ये सिर्फ तकनीकी सुधार है? या फिर सच में राजनीतिक अलार्म बज चुका है? ये तो वक्त ही बताएगा।

