Holi 2026: हवा में उड़ता गुलाल… ढोल-नगाड़ों की थाप… और “होली है!” के गूंजते नारे। उत्तर प्रदेश के काशी में रंगों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि देशी ही नहीं, विदेशी सैलानी भी खुद को इससे दूर नहीं रख पाए। काशी की गलियां रंग, उत्साह और संगीत से सराबोर नजर आईं।

धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में होली का अलग ही रंग देखने को मिला। गंगा घाटों से लेकर तंग गलियों तक डीजे की धुन पर लोग थिरकते नजर आए। विदेशी पर्यटक सिर पर “शुभ होली” लिखी टोपी लगाए, चेहरे पर अबीर-गुलाल मलकर पूरे उत्साह से जश्न मनाते दिखे।

एक बनारसी युवक ने विदेशी युवती को गुझिया खिलाते हुए मुस्कराकर कहा- “यह कल्चरल स्वीट्स है।” इस आत्मीयता ने सैलानियों का दिल जीत लिया। यहां ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, अमेरिका समेत करीब 20 देशों से पर्यटक होली (Holi 2026) का आनंद लेने पहुंचे हैं। अमेरिका से आए एक दंपती ने कहा- “हम यहां होली मनाने खास आए हैं। बहुत मजा आ रहा है, लोग बेहद फ्रेंडली हैं।”

Holi 2026: आयरलैंड से आई पर्यटक ने कही यह बात
आयरलैंड से आई एक महिला पर्यटक ने बताया कि वह विशेष रूप से काशी की होली का अनुभव लेने आई हैं। “यह त्योहार बेहद रंगीन और खुशियों से भरा है। हम जमकर होली खेलेंगे,” उन्होंने उत्साह से कहा।

वाराणसी की सड़कों पर विदेशी सैलानी भी बनारसी अंदाज में होली (Holi 2026) खेलते नजर आए। रास्ते में जो मिला, उस पर रंगों की बौछार कर दी। “ए राजा हमके बनारस घुमाई दा” जैसे भोजपुरी गानों पर देशी-विदेशी सभी झूम उठे।

अबीर-गुलाल से सराबोर सैलानी एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर रंग लगाते नजर आए। ढोल की थाप पर नाचते विदेशी मेहमानों को देख स्थानीय लोग भी उत्साह से भर उठे।

काशी में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति और आत्मीयता का उत्सव बन गई। बनारसी अंदाज, मेहमाननवाजी और संगीत के संग विदेशी सैलानियों ने भी खुद को पूरी तरह रंगों में रंग लिया।


