काशी में शारदीय नवरात्र की तरह चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) में भी तीन स्थानों पर दशकों से मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष भी तीनों स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी और चार दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

बताया जाता है कि आजादी से तीन वर्ष पहले से ही शिवाला स्थित आनंदमयी अस्पताल परिसर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की परंपरा चली आ रही है। इसी तरह विश्वनाथ मंदिर के समीप कालिका गली में पिछले 26 वर्षों से तथा पांडेय हवेली स्थित भोला गिरि आश्रम में सौ वर्षों से अधिक समय से वासंतिक नवरात्र (Chaitra Navratri) में प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही है। काशी की इन तीनों स्थानों की परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है।

Chaitra Navratri: एलोरा की थीम पर तैयार प्रतिमा

खोजवां स्थित मूर्ति कारखाने में प्रतिमाएं तैयार करने वाले मूर्तिकार अभिजीत विश्वास ने बताया कि इस वर्ष तीनों प्रतिमाएं पूरी तरह तैयार कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि आनंदमयी आश्रम और भोला गिरि आश्रम के लिए बंगला चाल शैली की पारंपरिक प्रतिमाएं (Chaitra Navratri) बनाई गई हैं, जबकि कालिका गली की प्रतिमा इस बार विशेष रूप से अजंता और एलोरा की थीम पर तैयार की गई है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।

मूर्तिकार (Chaitra Navratri) ने यह भी बताया कि प्रतिमाओं के श्रृंगार और आभूषण सहित अधिकांश सजावटी सामग्री मिट्टी से तैयार की गई है, जिससे प्रतिमाओं की पारंपरिक सुंदरता और धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।

आयोजकों के अनुसार, चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) की सप्तमी तिथि से मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ होगी, जो दशमी तक चलेगी। इस दौरान प्रतिदिन विधि-विधान से पूजन, आरती और सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विशेष रूप से आनंदमयी आश्रम में पूजा-अर्चना के लिए कोलकाता से पुरोहितों के साथ पारंपरिक ढाक वादक भी आएंगे, जो बंगाल की शैली में पूजा संपन्न कराएंगे। आयोजकों का कहना है कि इस चार दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

