इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पिछले 12-13 वर्षों से संविदा पर कार्यरत गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग पर एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने रिट याचिका संख्या 18901/2024 को निस्तारित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान, विश्वविद्यालय की ओर से जवाब दाखिल करने में हुई देरी और बार-बार समय मांगे जाने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने पूर्व की सुनवाई में BHU को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए ₹2,000 का हर्जाना लगाया था। यह राशि ‘हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद’ में जमा करने का निर्देश दिया गया था।
BHU: मामला क्या है?
अनूप कुमार और 39 अन्य कर्मचारियों ने याचिका दायर कर बताया था कि वे वर्ष 2013-14 से BHU में ऑफिस असिस्टेंट और ऑडिट असिस्टेंट जैसे पदों पर निरंतर अपनी सेवा दे रहे हैं। लंबे समय तक सेवा में रहने के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायालय के प्रमुख निर्देश:
- कुलपति लेंगे निर्णय: न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर अपना नया आवेदन (प्रत्यावेदन) कुलपति के समक्ष प्रस्तुत करें।
- तीन महीने की समय सीमा: BHU कुलपति को इस मामले का निपटारा तीन महीने के भीतर अनिवार्य रूप से करना होगा।
- नई नियुक्तियों पर शर्त: विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में निकाले गए विज्ञापन (संख्या 07/2024-2025) के तहत होने वाली नियुक्तियां, इस मामले में कुलपति द्वारा लिए गए निर्णय के अधीन रहेंगी।
इस आदेश के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन (BHU) को यह तय करना होगा कि वर्षों से सेवा दे रहे इन कर्मचारियों को किस प्रकार नियमित किया जा सकता है।

