Kashi में गंगा दशहरा का पर्व इस बार अभूतपूर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। काशी के प्रमुख घाटों—दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, काशी विश्वनाथ धाम का गंगा द्वार, पंचगंगा घाट, अस्सी घाट, केदार घाट और नमो घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दीपों की अलौकिक छटा, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और गंगा आरती ने पूरी काशी को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया।

दशाश्वमेध घाट पर भव्य महाआरती
दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि के तत्वावधान में आयोजित महाआरती और पूजन कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। समिति के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा के सानिध्य में मां गंगा (Kashi) का विशेष पूजन किया गया। दूध, पुष्प, फल और मिष्ठान से दुग्धाभिषेक एवं षोडशोपचार पूजन सम्पन्न हुआ। श्रद्धा स्वरूप मां गंगा को पियरी साड़ी अर्पित की गई।

महाआरती के दौरान वैदिक ब्राह्मणों ने एक साथ दीप स्तंभों से आरती उतारी, जबकि देव कन्याओं ने चंवर डुलाकर मातृशक्ति का आह्वान किया। घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रवाहित कर मां गंगा से सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
Kashi: अस्सी घाट पर माँ गंगा प्राकट्य उत्सव
अस्सी घाट पर आयोजित “माँ गंगा प्राकट्य उत्सव” ने श्रद्धालुओं (Kashi) को विशेष रूप से आकर्षित किया। ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास और श्रीकुल पीठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लाई गई 5100 साड़ियों से मां गंगा को भव्य चुनरी अर्पित की गई। साथ ही 56 परिवारों ने 56 प्रकार के भोग लगाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

पूज्य सचिन्द्र नाथ महाराज ने कहा कि मां गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। समाजसेवी अश्विनी शुक्ला ने लोगों से गंगा को स्वच्छ रखने का आह्वान किया। वहीं दुर्गा मंदिर के महंत कौशलपति द्विवेदी ने आयोजन को अलौकिक बताया। कार्यक्रम में रंगोली, चित्रकला, शास्त्रीय नृत्य और भजन-गायन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया गया।

महोत्सव के दौरान आयोजकों ने घोषणा की कि भारत के प्रधानमंत्री एवं काशी के सांसद नरेन्द्र मोदी को “गंगा भगीरथ विश्वगुरु काशी सम्मान” (Kashi) से सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, काशी के आध्यात्मिक पुनर्जागरण, गंगा स्वच्छता अभियान और घाटों के विकास में उनके योगदान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

इसके अलावा गंगा संरक्षण और सामाजिक सेवा (Kashi) से जुड़े कई लोगों को “गंगा पुत्र सम्मान”, “गंगा पुत्री सम्मान”, “गंगा सेवा भूषण सम्मान” और अन्य अलंकरणों से सम्मानित किया गया। वहीं पूज्य कल्कि महाराज को “जगतगुरु” की उपाधि प्रदान किए जाने की घोषणा भी आकर्षण का केंद्र रही।
पंचगंगा घाट पर 115 वर्षों पुरानी परंपरा का आयोजन
पंचगंगा घाट (Kashi) पर श्रीकाशी गंगोत्सव मंडल द्वारा 115 वर्षों से चली आ रही गंगा दशहरा उत्सव परंपरा को भव्य रूप से निभाया गया। पारंपरिक विधि-विधान से मां गंगा का पूजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में पार्षद संतोष सोलापुरकर, डॉ. माधव जनार्दन रटाटे, वासुदेव मंडलीकर और अन्य विशिष्ट लोग मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि प्राचीन काशी की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सहेजने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
केदार घाट पर गूंजे वैदिक मंत्र
केदार घाट पर भी गंगा दशहरा (Kashi) के अवसर पर विशेष पूजन, दुग्धाभिषेक और महाआरती का आयोजन किया गया। दीपों और फूलों से सजे घाट पर वैदिक ब्राह्मणों ने “ॐ नमो भगवति गंगे” और “ॐ गंगे च यमुने चैव…” जैसे मंत्रों के बीच पूजन कराया।
श्रद्धालुओं ने दूध, पुष्प, अक्षत और दीप अर्पित कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। शंखध्वनि और घंटियों की गूंज के बीच आयोजित महाआरती ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। इसके बाद आयोजित भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा।

