BJP: डायलिसिस के लिए अस्पताल ले जाए गए सेवानिवृत्त शिक्षक की करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 70 बिस्वा पुश्तैनी जमीन कथित रूप से हड़पने का मामला सामने आया है। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर BJP के जिला उपाध्यक्ष, तत्कालीन उपनिबंधक और निबंधन कार्यालय के लिपिक सहित 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले ने जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया और कथित साजिश को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोहनिया थाना क्षेत्र के मोहनसराय निवासी प्रमिला मिश्रा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में आवेदन देकर आरोप लगाया कि उनके पति ओमप्रकाश मिश्रा, जो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, पिछले दो वर्षों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और सप्ताह में दो बार डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी पुश्तैनी जमीन हड़पने की साजिश रची गई।
इलाज और आयुष्मान कार्ड के नाम पर रची गई कथित योजना
आवेदन के अनुसार, ओमप्रकाश मिश्रा के भतीजे विशाल मिश्रा और घरेलू ड्राइवर रवि उपाध्याय पहले उन्हें डायलिसिस के लिए अस्पताल ले जाने में मदद करते रहे। बाद में दोनों ने आयुष्मान कार्ड बनवाने और इलाज का खर्च कम कराने का भरोसा दिलाया। आरोप है कि इसी बहाने ओमप्रकाश मिश्रा (BJP) के नाम से नया बैंक खाता खुलवाया गया और उनके मोबाइल नंबर के साथ पेंशन खाते में पंजीकृत मोबाइल नंबर भी बदलवा दिया गया।
अचेत अवस्था में कराई गई रजिस्ट्री का आरोप
प्रमिला मिश्रा के अनुसार, 7 अप्रैल 2026 को विशाल मिश्रा और रवि उपाध्याय ओमप्रकाश मिश्रा को महमूरगंज स्थित गैलेक्सी हॉस्पिटल में डायलिसिस के लिए ले गए। आरोप है कि डायलिसिस के बाद अचेत अवस्था में होने के बावजूद उन्हें गंगापुर निबंधन कार्यालय ले जाया गया।
वहां तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार और निबंधन लिपिक सत्यांशु सिंह की कथित मिलीभगत से शाम 4:34 बजे से 4:41 बजे के बीच लगभग 70 बिस्वा जमीन का बैनामा और दो दानपत्र आरोपियों एवं उनके करीबियों (BJP) के नाम दर्ज करा दिए गए। इतना ही नहीं, उसी रात 11:31 बजे से 11:35 बजे के बीच पूरी संपत्ति का विक्रय पत्र और अनुबंध पत्र भी निष्पादित करा दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले में पुलिस ने पहले कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद प्रमिला मिश्रा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर रोहनिया थाने में 5 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की गई। रोहनिया इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि अदालत के निर्देश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
प्रमिला मिश्रा की तहरीर के आधार पर विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, वरुणापति उपाध्याय, प्रवीण कुमार सिंह, नितेश राय, भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह, अजय कुमार तिवारी, प्रशांत कुमार सिंह, तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार और निबंधन कार्यालय के लिपिक सत्यांशु सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है।
धमकी और रेकी कराने का भी आरोप
प्रमिला मिश्रा ने अदालत को दिए आवेदन में यह भी आरोप (BJP) लगाया कि आरोपियों का राजनीतिक प्रभाव है और शिकायत करने के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुंह ढके युवक उनके परिवार की रेकी कर रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि उन्होंने पहले रोहनिया थाना और पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मोहनसराय में 70 बिस्वा जमीन हड़पने के मामले में उपनिबंधक, लिपिक समेत 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
BJP जिला उपाध्यक्ष ने आरोपों से किया इनकार
BJP जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि ओमप्रकाश मिश्रा ने स्वयं अदालत के माध्यम से अपने भतीजे के नाम जमीन दान की थी। उन्होंने बताया कि बाद में उसी भतीजे से उन्होंने जमीन खरीदी। उनका कहना है कि खरीद से पहले सभी अभिलेखों की जांच की गई थी और जमीन भतीजे के नाम दर्ज थी। उन्होंने दावा किया कि पूरी रजिस्ट्री कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कराई गई। यदि किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए भतीजा जिम्मेदार होगा।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले को लेकर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि सत्ता की आड़ में किस प्रकार की कथित जालसाजी की जा रही है। उनका कहना था कि यदि सत्ता (BJP) में रहते हुए इस तरह के आरोप सामने आते हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और जनता चुनाव में इसका जवाब देगी।
अब इस मामले में अदालत के आदेश पर दर्ज प्राथमिकी के बाद पुलिस जांच शुरू हो चुकी है। एक ओर शिकायतकर्ता पक्ष जमीन हड़पने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगा रहा है, वहीं आरोपी पक्ष सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को कानूनी रूप से सही बता रहा है। ऐसे में अब जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे प्रकरण (BJP) में जिम्मेदारी किसकी तय होती है।



