वाराणसी का Gyanvapi विवाद….जिसपर सभी की निगाहें टिकी हुई है। यह एक ऐसा संवेदनशील मामला है, जिसको लेकर यह आए दिन लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। हालांकि अब इस ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद में एक नया मोड सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षकारों को एक नोटिस जारी किया है, जिसमें सभी पक्षकारों को मध्यस्थता करने की बात कही गई है। साथ ही साथ इस नोटिस के जरिए यह भी बताया गया है कि आगामी 14 जुलाई को सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ सिविल कोर्ट में उपस्थित हो और जज के सामने मध्यस्थता कर इस वाद-विवाद का एक हल निकालें।
Gyanvapi के इस मामले पर कोई सहमति नहीं
वहीं इस मामले को लेकर हिंदू पक्ष में खासा नाराजगी भी देखी जा रही है। उनके द्वारा पुरे Gyanvapi परिसर की बात हो रही। इसके विपरीत मुस्लिम पक्ष ने भी किसी भ हालात में मस्जिद छोड़ने से इन्कार कर दिया है। इतना ही नहीं, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का यह फैसला भी सामने आया है कि वह इस मध्यस्थता समारोह में किसी भी परिस्थिति में शामिल नहीं होंगे।
उच्च न्यायालय की नोटिस के बाद अब अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी की तरफ से एक लेटर जारी किया गया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह कोर्ट के इस मध्यस्तता के आमंत्रण के बाध्यकारी नहीं है।
बता दें कि सिर्फ Gyanvapi ही नहीं, इसके साथ-साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल की शाही जामा मस्जिद मामले पर भी पूरे देश की नजर बनी हुई है। इन तीनों विवादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की एक कोशिश की, लेकिन यह पहल शुरुआत से पहले ही ठहरती नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने ‘समाधान समारोह-2026’ के तहत दोनों पक्षों को मध्यस्थता का प्रस्ताव भेजा था। मकसद था कि वर्षों से चल रहे इन संवेदनशील विवादों का हल अदालत के बाहर आपसी सहमति से निकाला जा सके। लेकिन हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही पक्षों ने साफ कर दिया कि वे समझौते के बजाय अदालत के फैसले को ही अंतिम मानेंगे।
हालांकि इन तीनों मामलों में एक बात समान है कि इतिहास की अलग-अलग व्याख्याएं, धार्मिक आस्थाएं और जटिल कानूनी प्रश्न। और अब, जब मध्यस्थता का प्रस्ताव दोनों पक्षों ने अस्वीकार कर दिया है, तो यह लगभग तय है कि इन विवादों का रास्ता फिलहाल अदालतों से होकर ही गुजरेगा।



