बाबा विश्वनाथ की नगरी Kashi में सावन का महीना केवल आस्था और श्रद्धा का ही नहीं, बल्कि व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू हो रहे सावन को लेकर शहर के बाजार पूरी तरह तैयार हैं। व्यापारिक संगठनों का अनुमान है कि पूरे सावन माह में करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार होगा। इसका लाभ केवल बड़े व्यापारियों को ही नहीं, बल्कि फूल विक्रेताओं, कारीगरों, बुनकरों, नाविकों, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों तक पहुंचेगा।
सावन में देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए वाराणसी पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ शहर के धार्मिक और पर्यटन आधारित कारोबार में जबरदस्त तेजी आने की संभावना है।
Kashi: फूल और पूजा सामग्री की बढ़ेगी मांग
सावन के दौरान फूलों और पूजा सामग्री की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। बांसफाटक फूलमंडी (Kashi) के विक्रेता चन्द्रमोहन माली ने बताया कि इस समय बेलपत्र, धतूरा, मदार की मालाएं, कमल, गेंदा और अन्य पूजा सामग्री की मांग सबसे अधिक रहती है। बाबा विश्वनाथ सहित शहर के छोटे-बड़े मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु बड़ी मात्रा में इन वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार केवल फूल और पूजा सामग्री के बाजार से लगभग 30 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। इसके लिए व्यापारियों ने पहले से ही पर्याप्त मात्रा में सामग्री का भंडारण कर लिया है।
पीतल उद्योग को भी मिलेगा बड़ा सहारा
सावन का महीना वाराणसी के पारंपरिक पीतल उद्योग के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ठठेरी बाजार में पीतल के शिवलिंग, नंदी, पूजा के दीपक, घंटियां, तांबे के पात्र और रुद्राक्ष की मालाओं की मांग तेजी से बढ़ने लगी है।
पीतल कारोबारी विशाल कसेरा ने बताया कि पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा दक्षिण भारतीय और विदेशी पर्यटक भी काशी से धार्मिक स्मृति-चिह्न खरीदना पसंद करते हैं। इस बार करीब 100 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद जताई जा रही है।
भगवा वस्त्र, होटल और रेस्टोरेंट भी होंगे गुलजार
सावन में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने से भगवा वस्त्र, पूजा के कपड़े, गंगाजल पात्र, धार्मिक पुस्तकें और प्रसाद की बिक्री में भी तेजी आएगी। इसके साथ ही होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट कारोबारियों को भी अच्छा व्यवसाय मिलने की उम्मीद है।
शहर के प्रमुख घाटों, मंदिरों और बाजारों (Kashi) के आसपास स्थित होटल और भोजनालयों में पहले से ही बुकिंग बढ़ने लगी है। धार्मिक पर्यटन के कारण परिवहन, ई-रिक्शा, ऑटो, नाव संचालन और स्थानीय गाइडों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को मिलेगा लाभ
सावन के दौरान होने वाला कारोबार केवल बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय स्तर पर पूजा सामग्री तैयार करने वाले कारीगर, फूल उत्पादक किसान, बुनकर, नाविक, हस्तशिल्प विक्रेता और रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले हजारों परिवारों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। काशी के पारंपरिक उत्पादों की बढ़ती मांग स्थानीय बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
धार्मिक पर्यटन से मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
डीएवी पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप मिश्रा ने बताया कि सावन में काशी (Kashi) की अर्थव्यवस्था को मिलने वाली रफ्तार धार्मिक पर्यटन आधारित सूक्ष्म अर्थव्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि 300 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय कारीगरों, फूल विक्रेताओं, बुनकरों, नाविकों और छोटे व्यवसायियों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। स्थानीय उत्पादों (Kashi) की बढ़ती मांग से काशी की अर्थव्यवस्था में “मल्टीप्लायर इफेक्ट” मजबूत होगा, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
सावन को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक
सावन शुरू होने से पहले ही शहर (Kashi) के प्रमुख बाजारों—बांसफाटक, ठठेरी बाजार, गोदौलिया, चौक, विश्वनाथ गली और दशाश्वमेध क्षेत्र—में रौनक बढ़ने लगी है। व्यापारी दुकानों को सजा रहे हैं और श्रद्धालुओं की जरूरतों के अनुरूप विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
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व्यापारियों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान के अनुरूप रही तो इस वर्ष सावन का कारोबार पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक बेहतर साबित हो सकता है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में सावन एक बार फिर आस्था, धार्मिक पर्यटन और व्यापार (Kashi) के संगम का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

