कश्मीर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat) ने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज चिनाब ब्रिज पर पहली बार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़कर नया इतिहास रच दिया। 1178 फीट की ऊंचाई पर बने इस विशाल पुल से गुजरती ट्रेन का नजारा बेहद रोमांचक रहा। भारत की इंजीनियरिंग और रेलवे के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
हाल ही में रेलवे मंत्रालय ने नॉर्दर्न रेलवे के जम्मू डिवीजन में श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा और बनिहाल के बीच 111 किलोमीटर लंबे नए ब्रॉडगेज रेल सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा करने की मंजूरी दी थी। इसके बाद इस पूरे सेक्शन (Vande Bharat) पर ट्रेनें पहले की तुलना में अधिक गति से चल सकेंगी।
इससे पहले श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा से संगलदान सेक्शन में ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटा और संगलदान से बनिहाल सेक्शन में 75 किलोमीटर प्रति घंटा थी। रफ्तार बढ़ाए जाने से जम्मू से कश्मीर के बीच रेल यात्रा और तेज होने की उम्मीद है।
2025 में पूरा हुआ कश्मीर तक Vande Bharat का सपना
कश्मीर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का सपना फरवरी 2025 में साकार हुआ था। जम्मू तवी और श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत (Vande Bharat) करीब 269 किलोमीटर की दूरी लगभग 4 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है।
यह ट्रेन बेहद चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रेल मार्ग से गुजरती है। इस दौरान यह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज चिनाब ब्रिज और देश के पहले केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज अंजी खड्ड ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण पुलों को पार करती है।
क्या है वंदे भारत का रूट?
वंदे भारत एक्सप्रेस (26401) मंगलवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी दिनों में चलती है। यह ट्रेन जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से सुबह 6:20 बजे रवाना होती है और उधमपुर, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा, रियासी और बनिहाल होते हुए सुबह 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचती है।
वहीं, दूसरी वंदे भारत एक्सप्रेस (26403) जम्मू तवी से दोपहर 1:20 बजे रवाना होती है। यह ट्रेन (Vande Bharat) करीब 4 घंटे 45 मिनट में जम्मू तवी से श्रीनगर पहुंचती है।
कितना है किराया?
वंदे भारत एक्सप्रेस (26401)
- एसी चेयर कार: ₹855
- एग्जीक्यूटिव क्लास: ₹1,585
वंदे भारत एक्सप्रेस (26403)
- एसी चेयर कार: ₹1,020
- एग्जीक्यूटिव क्लास: ₹1,780
चिनाब ब्रिज पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वंदे भारत का दौड़ना न सिर्फ रेल यात्रा को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता और इंजीनियरिंग का भी शानदार प्रदर्शन है।
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