टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने नहीं रहेंगे। उन्होंने दोबारा चेयरमैन बनने के लिए अपना नाम आगे नहीं रखने का फैसला किया है। टाटा ट्रस्ट्स ने उनके इस निर्णय का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने बुधवार, 12 अगस्त को अपने फैसले की जानकारी दी। वह जनवरी 2017 में पहली बार टाटा संस के चेयरमैन नियुक्त हुए थे और 21 फरवरी 2017 को उन्होंने आधिकारिक रूप से पदभार संभाला था। मौजूदा समय में वह अपने दूसरे कार्यकाल में हैं, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा।
टाटा ट्रस्ट्स ने क्या कहा?
टाटा ट्रस्ट्स ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) के दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखने के फैसले का सम्मान करता है। ट्रस्ट ने टाटा संस और टाटा समूह के लिए पिछले एक दशक में उनके योगदान और नेतृत्व की सराहना भी की।
टाटा ट्रस्ट्स ने बताया कि उसके ट्रस्टियों ने एक चयन समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह समिति टाटा संस के नए चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी।
ट्रस्ट ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारु, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करेगा। यह बदलाव टाटा संस और टाटा समूह के मूल्यों और दीर्घकालिक हितों के अनुरूप किया जाएगा।
N. Chandrasekaran: 40 साल के सफर के बाद लिया फैसला
अपने बयान में चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने कहा कि उन्होंने टाटा समूह में 40 साल पूरे किए हैं। पिछले 10 वर्षों तक टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए बड़े सम्मान और जिम्मेदारी की बात रही है।
उन्होंने बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने की सिफारिश की थी। हालांकि, बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। बोर्ड की बैठक के बाद छह महीने बीत जाने के बावजूद इस पर कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया।
चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने कहा कि टाटा संस में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारी साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए कंपनी के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
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इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखने का फैसला किया। उन्होंने बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है, ताकि नेतृत्व का बदलाव समय पर और बिना किसी व्यवधान के पूरा किया जा सके।

