बनारस रेल मंडल में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि अधिकारी ने फर्नीचर की आपूर्ति करने वाले एक ठेकेदार का भुगतान संबंधी बिल पास करने के बदले 1.70 लाख रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया।
बिल पास कराने के एवज में मांगी गई थी रकम
मिली जानकारी के अनुसार, बनारस रेल मंडल में तैनात वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक (Senior Divisional Materials Manager) नितेश अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने फर्नीचर सप्लाई करने वाले ठेकेदार से बिल पास करने के लिए रिश्वत की मांग की। ठेकेदार ने इस मांग की जानकारी CBI को दी, जिसके बाद एजेंसी ने शिकायत का सत्यापन कर ट्रैप की पूरी योजना तैयार की। कार्रवाई के दौरान अधिकारी को कथित रूप से 1.70 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।
दफ्तर और आवास पर भी हुई CBI की जांच
गिरफ्तारी के बाद CBI की टीम ने अधिकारी के कार्यालय और सरकारी आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल की गई। अधिकारियों के मुताबिक मामले से जुड़े कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं और संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है।
इस कार्रवाई के बाद रेलवे महकमे में पूरे दिन हलचल बनी रही और अधिकारी-कर्मचारियों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा का दौर चलता रहा। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि मामला केवल एक लेन-देन तक सीमित था या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका भी है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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वाराणसी में सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामलों पर CBI पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। वर्ष 2025 में केंद्र सरकार की गति शक्ति परियोजना से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में छापेमारी की गई थी। इसके अलावा अक्टूबर 2024 में डीआरएम कार्यालय में एक वरिष्ठ मंडल अभियंता को दो लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अप्रैल 2024 में भी पूर्वोत्तर रेलवे के एक वरिष्ठ इंजीनियर के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की गई थी।
