Varanasi: महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल का 10वां संस्करण इस साल 4 से 6 दिसंबर 2026 तक वाराणसी में आयोजित किया जाएगा। महिंद्रा ग्रुप की ओर से प्रस्तुत और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा निर्मित यह फेस्टिवल संत-कवि कबीर की विचारधारा, दर्शन और उनकी वाणी को समर्पित है।

एक दशक का सफर पूरा कर रहा यह आयोजन (Varanasi) संगीत, साहित्य और वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जोड़ता है। इस बार फेस्टिवल में देश के कई प्रमुख कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें अरुणा सैराम, शबनम विर्मानी, कबीर कैफे, कलापिनी कोमकली, फकीरा, द आह्वान प्रोजेक्ट, महाराज ट्रियो, उमेश कबीर, श्वेता हट्टंगड़ी किलपाड़ी और कमला शंकर शामिल हैं।

फेस्टिवल के आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में शास्त्रीय, लोक, भक्ति और समकालीन संगीत की अलग-अलग शैलियां देखने को मिलेंगी। कलाकार अपनी-अपनी शैली में कबीर की रचनाओं और विचारों को प्रस्तुत करेंगे। यही विविधता महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल (Varanasi) की खास पहचान मानी जाती है।

Varanasi: कबीर के विचारों को जोड़ने की कोशिश
महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल ने पिछले दस वर्षों में खुद को केवल संगीत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा है। आयोजन के जरिए कबीर के उदारता, सहिष्णुता और करुणा जैसे विचारों को आज के समय से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के बीच आयोजित होने वाला यह फेस्टिवल (Varanasi) संगीत के साथ साहित्य, कला, इतिहास और स्थानीय विरासत से भी लोगों को जोड़ता है। आयोजकों का कहना है कि वर्षों से कलाकारों, दर्शकों और विचारकों का इससे जुड़ना इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

2026 के संस्करण में गंगा किनारे सुबह और शाम के संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ साहित्यिक चर्चाएं और कई सांस्कृतिक गतिविधियां भी होंगी। करीब ढाई दिनों तक चलने वाले फेस्टिवल में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय संगीत प्रस्तुतियों के अलावा हेरिटेज वॉक, मंदिर दर्शन, गंगा आरती, नौका विहार और वाराणसी के स्थानीय व्यंजनों का अनुभव भी शामिल रहेगा।
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फेस्टिवल में देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों के लिए विशेष पैकेज भी तैयार किए गए हैं, ताकि वे संगीत कार्यक्रमों के साथ वाराणसी (Varanasi) की संस्कृति और विरासत को भी करीब से अनुभव कर सकें।

पहले भी शामिल हो चुके हैं कई बड़े नाम
महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल के पिछले संस्करणों में पंडित अजय चक्रवर्ती, प्रह्लाद सिंह टिपानिया, मुख्तियार अली, अरुणा सैराम, द रघु दीक्षित प्रोजेक्ट, इंडियन ओशन, थैक्कुडम ब्रिज, अनवर खान मंगनियार, शबनम विर्मानी, कबीर कैफे, कैलाश खेर, शुभा मुद्गल, मूरालाला, मालिनी अवस्थी, दस्तान लाइव, परेश मैती, पुरुषोत्तम अग्रवाल और लिंडा हेस जैसे कलाकार और विचारक हिस्सा ले चुके हैं।

फेस्टिवल में आने वाले प्रतिनिधियों के लिए संगीत और साहित्य के साथ वाराणसी की जीवनशैली और विरासत को समझने का अवसर भी होगा। आयोजकों (Varanasi) की ओर से उनके लिए पारंपरिक स्वागत, स्थानीय भोजन, सांस्कृतिक भ्रमण और अन्य गतिविधियों को शामिल किया गया है।
प्रतिनिधियों के लिए प्रमुख कार्यक्रम
- पारंपरिक तरीके से स्वागत
- सुबह और शाम के संगीत कार्यक्रम
- गंगा आरती
- नौका विहार और मंदिर दर्शन
- हेरिटेज वॉक
- दोपहर के साहित्यिक सत्र
- पारंपरिक भोजन और आतिथ्य
इस तरह महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल (Varanasi) का 10वां संस्करण संगीत के साथ कबीर के विचारों और वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने की कोशिश करेगा।

