Varanasi: शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को काशी में मां भगवती के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दुर्गाकुंड स्थित मां दुर्गा मंदिर में भोर से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। मां के दर्शन के लिए भक्तों की करीब दो किलोमीटर लंबी कतार लग गई। श्रद्धालु हाथों में फूल, नारियल और चुनरी लेकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है। पौराणिक कथाओं में वर्णन है कि जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था, तब मां भगवती ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है।
नवरात्र के चौथे दिन भक्त मां को गुड़हल के फूल, नारियल और चुनरी अर्पित करते हैं। मंदिर (Varanasi) के महंत दीपू दुबे के अनुसार, इस दिन मां की विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु मंत्रों का जाप कर देवी से परिवार के कल्याण और सुख-शांति की कामना करते हैं।
सब्जी और अन्न का दान करने की भी परंपरा
नवरात्र के चौथे दिन सब्जी और अन्न का दान करना भी धार्मिक दृष्टि से फलदायी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं में मां भगवती के शाकंभरी स्वरूप का संबंध प्रकृति, अन्न और पोषण से जोड़ा गया है। मान्यता है कि देवी ने शाक-सब्जियों के माध्यम से संसार (Varanasi) के जीवों का पोषण किया। इसी वजह से इस दिन जरूरतमंदों को अन्न और सब्जियां दान करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
Varanasi: 18वीं शताब्दी में रानी भवानी ने कराया था मंदिर का जीर्णोद्धार
दुर्गाकुंड (Varanasi) स्थित मां दुर्गा मंदिर काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। लाल पत्थरों से निर्मित यह मंदिर नागर स्थापत्य शैली का उदाहरण माना जाता है। मंदिर के एक ओर दुर्गाकुंड स्थित है। परिसर में बाबा भैरवनाथ के साथ मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां काली की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां विशाल हवन कुंड में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार, बंगाल की रानी भवानी ने 18वीं शताब्दी में इसका जीर्णोद्धार कराया था। वर्ष 1760 का उल्लेख भी मंदिर के जीर्णोद्धार के संदर्भ में मिलता है।
काशी नरेश की पुत्री से जुड़ी है मंदिर की पौराणिक कथा
मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या के राजकुमार सुदर्शन और काशी नरेश सुबाहु की पुत्री के विवाह प्रसंग में मां भगवती ने हस्तक्षेप किया था। मान्यता है कि देवी ने काशी नरेश को स्वप्न में दर्शन देकर अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार सुदर्शन से कराने का निर्देश दिया। कथा (Varanasi) में देवी के विरोधी राजाओं का संहार करने और रक्त से कुंड भरने का उल्लेख मिलता है, जिसे दुर्गाकुंड से जोड़कर देखा जाता है।
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मां दुर्गा मंदिर (Varanasi) में देवी भगवती के मुखौटे और चरण पादुकाओं की पूजा की भी परंपरा है। मंदिर की पूजा-पद्धति और स्थापत्य से जुड़ी कुछ मान्यताएं इसे विशेष पहचान देती हैं। नवरात्र के दौरान यहां दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मां के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
