Varanasi: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर मानवता, सेवा और धार्मिक आस्था का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। हरिश्चंद्र घाट स्थित काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति और ॐ काशी अन्नपूर्णा ट्रस्ट की ओर से इस वर्ष 1036 से अधिक लावारिस शवों का महापिंडदान कराया गया। गुलेरिया घाट पर 11 विद्वान ब्राह्मणों ने पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इस दौरान दिवंगत आत्माओं की शांति और सद्गति की कामना की गई। संस्था की यह पहल उन लोगों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त करने का प्रयास है, जिनका इस दुनिया में अंतिम संस्कार करने वाला कोई अपना सामने नहीं आया।

12 वर्षों से कर रहे हैं लावारिस शवों का अंतिम संस्कार
काशी (Varanasi) मोक्षदायिनी सेवा समिति और ॐ काशी अन्नपूर्णा ट्रस्ट के अध्यक्ष पवन चौधरी ने बताया कि संस्था पिछले 12 वर्षों से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार और उनके निमित्त पिंडदान का कार्य करती आ रही है। इस वर्ष भी संस्था की ओर से 1036 से अधिक लावारिस शवों का निःशुल्क दाह-संस्कार कराया गया। पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर इन दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए सामूहिक पिंडदान का आयोजन किया गया।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों का पता नहीं चल पाता या अंतिम संस्कार के लिए कोई आगे नहीं आता, उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार का प्रयास करना संस्था का उद्देश्य है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। इसी भावना के साथ संस्था की ओर से प्रत्येक वर्ष यह अनुष्ठान कराया जाता है।

Varanasi: 11 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया पिंडदान
पितृ विसर्जन के अवसर पर गुलेरिया घाट पर आयोजित कार्यक्रम में 11 विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पिंडदान कराया। दिवंगत आत्माओं की शांति और मोक्ष की कामना के साथ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। कार्यक्रम (Varanasi) में उपस्थित लोगों ने भी श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान में सहभागिता की और दिवंगत आत्माओं के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

समाजसेवियों और गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर (Varanasi) राजहर्षित शुक्ला, केशव जालान, निधिदेव अग्रवाल, शिव कुमार मौर्य, डॉ. सुमित तिवारी, राजेश मिश्रा, संतोष पाल, राजन शुक्ला, सुनील चौबे, मुनिप पटेल, वैभव सिंह, माधुरी देवी, वेदवती देवी, अंशुमान जायसवाल, दीपचंद्र विश्वकर्मा, रमाकांत मिश्रा, दीपक स्थाना, तमन राय, प्रदीप सिंह, संजय सिंह, आनंद पटेल, प्रदीप साहनी, श्रवण भारद्वाज, भालू गुप्ता, प्रवीण चौबे, मुन्ना तिवारी, अभिषेक केशरी, विजय मजूम दास, डॉ. संतोष सिंह विश्वकर्मा, सोनू सिंह, राजू और गोविंद गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मानवता और सेवा का संदेश
काशी (Varanasi) की धार्मिक परंपराओं में अंतिम संस्कार और पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मकांडों का विशेष स्थान है। ऐसे में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराना और उनके लिए पिंडदान करना सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मानवीय संवेदना का भी प्रतीक है।
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संस्था की ओर से किया जा रहा यह कार्य समाज को संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। जाति, धर्म और पारिवारिक पहचान से परे दिवंगत व्यक्ति के प्रति संवेदना और सम्मान बनाए रखना ही मानवता का मूल भाव है।

