Varanasi: सोनार समाज की एकता, सम्मान, सुरक्षा, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी समेत विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर वाराणसी में 20 सितंबर 2026 को सोनार महा समागम का आयोजन किया जाएगा। चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में सुबह 11 बजे प्रस्तावित इस महा समागम में काशी के साथ प्रदेश के करीब 25 जिलों से समाज के प्रतिनिधियों के शामिल होने की तैयारी है।
शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कार्यक्रम (Varanasi) की जानकारी देते हुए स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान के राष्ट्रीय चेयरमैन रवि सर्राफ ने बताया कि महा समागम की तैयारियां पिछले छह महीने से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में सोनार समाज के व्यापारियों और कारीगरों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा की जाएगी।
बीएनएस की धारा 317 को लेकर भी होगी चर्चा
रवि सर्राफ ने बताया कि सर्राफा कारोबारियों के सामने आने वाली कथित कानूनी और पुलिस संबंधी दिक्कतों पर भी महा समागम में चर्चा होगी। विशेष रूप से बीएनएस की धारा 317 से जुड़े मामलों और उससे संबंधित कठिनाइयों, पुलिस कार्रवाई तथा समाधान के लिए सामूहिक पहल पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इसके अलावा व्यापारियों (varanasi) की सुरक्षा, सम्मानजनक एवं न्यायपूर्ण वातावरण, सामाजिक उत्थान, शिक्षा, रोजगार और युवाओं को आगे बढ़ाने जैसे विषय भी महा समागम के केंद्र में रहेंगे।
Varanasi: 25 जिलों में जनसंपर्क, प्रतिनिधियों को न्योता
आयोजकों (Varanasi) के मुताबिक, महा समागम को लेकर प्रदेश के लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, रॉबर्ट्सगंज, आजमगढ़, गोरखपुर, संत कबीर नगर, जौनपुर, देवरिया, कुशीनगर, बलिया, मऊ, इटावा, कानपुर, आगरा, झांसी, कौशांबी, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही और गाजीपुर समेत कई जिलों में जनसंपर्क किया गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और बिहार के समाज के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
संस्थान के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद किशोर सेठ ने बताया कि काशी को 30 सेक्टर में बांटकर सोनार समाज के घर-घर जनसंपर्क किया गया है। उन्होंने कहा कि महा समागम में राजनीतिक भागीदारी (Varanasi) के मुद्दे पर भी समाज की ओर से अपनी बात रखी जाएगी। उनके मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की भी तैयारी है।
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संस्थान की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता सर्राफ ने बताया कि महा समागम में युवाओं, महिलाओं, व्यवसायियों, कारीगरों और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने समाज के लोगों से व्यक्तिगत मतभेदों और स्वार्थ से ऊपर उठकर एकता, संगठन और सामूहिक हित के लिए महा समागम में शामिल होने की अपील की।

