Varanasi: गुरुवार सुबह से ही वाराणसी के मौसम में बदलाव देखने को मिला। आसमान में घने काले बादल छाए रहे और शहर के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश होती रही। बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले कई दिनों से उमस झेल रहे लोगों को राहत मिली। मौसम में बदलाव का असर दिनभर बना रहा और धूप भी अपेक्षाकृत कमजोर रही।
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। गुरुवार और शुक्रवार को वाराणसी (Varanasi) तथा आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है। शनिवार को भी आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। हालांकि रविवार से मौसम के धीरे-धीरे साफ होने के आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर पूर्वांचल के मौसम पर दिखाई दे रहा है। इसके प्रभाव से वाराणसी और आसपास के इलाकों (Varanasi) में अगले दो दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। गुरुवार और शुक्रवार को हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
सामान्य से नीचे रहा तापमान
लगातार बादल छाए रहने और बारिश होने से वाराणसी (Varanasi) के तापमान में भी गिरावट आई। गुरुवार को अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.1 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य से 0.8 डिग्री कम है। बुधवार को दिन और रात के तापमान में करीब सात डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया गया था। बुधवार शाम 7:30 बजे तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस रहा।
बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में मौसम सुहाना हो गया। उमस से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। हालांकि तेज बारिश होने की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है।
Varanasi: किसानों के लिए बीएचयू ने जारी की सलाह
मौसम में बदलाव को देखते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (Varanasi) के भू-भौतिकी विभाग की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने किसानों के लिए भी आवश्यक सलाह जारी की है। नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह और तकनीकी अधिकारी शिवमंगल सिंह ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों तक बारिश की संभावना बनी हुई है।
इस समय धान की फसल बाली बनने की अवस्था में पहुंच रही है। ऐसे में जिन खेतों में पर्याप्त नमी मौजूद है, वहां किसानों को अलग से सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अनावश्यक सिंचाई से बचने की सलाह दी है।
तेज हवा से धान की फसल गिरने का खतरा
मौसम विभाग के अनुसार बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। हवा की गति अधिक होने पर बाली बनने की अवस्था वाली धान की फसल के गिरने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए किसानों को खेतों में पानी के निकास की व्यवस्था पहले से दुरुस्त रखने की सलाह दी गई है।
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से धान की फसल प्रभावित हो सकती है। इसलिए बारिश के दौरान और उसके बाद खेतों का निरीक्षण करते रहें। जहां पानी अधिक जमा हो, वहां तत्काल निकासी की व्यवस्था की जाए।
कीट और रोगों पर भी रखें नजर
बारिश के बाद वातावरण में नमी बढ़ने से धान की फसल में कीट और रोग लगने की संभावना भी बढ़ सकती है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों (Varanasi) के मुताबिक बारिश थमने के बाद खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखना जरूरी है। किसी तरह के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते आवश्यक कृषि उपाय किए जाएं।
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फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार शुक्रवार तक बारिश और तेज हवाओं (Varanasi) का दौर बने रहने की संभावना है। शनिवार को बादल छाए रह सकते हैं, जबकि रविवार से मौसम में सुधार आने की उम्मीद है।

