डिजिटल पेमेंट या UPI से ट्रांसफर करना आज आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। किराना दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक लोग UPI के जरिए आसानी से भुगतान करते हैं। लेकिन अब UPI के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर व्यापारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
कई व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। इस दौरान व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों पर UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स आदि को काले कपड़े से ढककर विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 2 अक्टूबर को देशभर में UPI सेवा बंद रहेगी। यह व्यापारी संगठनों की ओर से अपने प्रतिष्ठानों पर UPI भुगतान स्वीकार न करने का विरोध कार्यक्रम है।
आखिर किस बात का विरोध कर रहे हैं व्यापारी?
विरोध ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) यूपीआई भुगतान पर 0.40 प्रतिशत MDR लगाए जाने को लेकर है। यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी सामने आई है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि खुदरा कारोबार में मुनाफे का मार्जिन कई मामलों में सीमित होता है और अतिरिक्त भुगतान लागत से कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
व्यापारी संगठनों ने इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। इंदौर समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में 23 सितंबर को व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ के जरिए विरोध भी दर्ज कराया। रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने इसमें भाग लिया।
2 अक्टूबर को किन संगठनों ने समर्थन किया?
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ के आयोजन की जानकारी दी है। उनके मुताबिक महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों के व्यापारिक संगठनों से भी इस अभियान को लेकर बातचीत हुई है।
रिपोर्ट में जिन संगठनों के समर्थन का उल्लेख है, उनमें Federation of Retail Traders Welfare Association (FRTWA), All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF), All India Mobile Retailers Association (AIMRA), All India Jewellers and Goldsmith Federation (AIJGF) और All India Edible Oil Traders Federation (AIEOTF) शामिल हैं। MACCIA से जुड़े करीब 500 संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा अपनी मांगें सरकार के सामने रखने की योजना भी बताई गई है।
क्या है MDR शुल्क?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए व्यापारी से लिया जाता है। UPI के मामले में यह व्यवस्था मुख्य रूप से मर्चेंट यानी व्यापारी को किए जाने वाले P2M भुगतान से जुड़ी है।
नए ढांचे के अनुसार, पात्र ₹2,000 से अधिक के P2M UPI लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत MDR लागू होगा। वहीं, ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के UPI भुगतान पर भी यह शुल्क लागू नहीं है।
अधिकतम ₹300 तक होगी MDR की सीमा
प्रस्तावित व्यवस्था में MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति पात्र लेन-देन बताई गई है। यानी बड़े पात्र लेन-देन पर भी MDR की अधिकतम राशि ₹300 तक सीमित रहेगी। रिपोर्टों के अनुसार ₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेन-देन पर यह कैप लागू होगा।
ग्राहकों से UPI भुगतान का अलग शुल्क नहीं
इस व्यवस्था को लेकर एक अहम बात यह है कि ग्राहकों से यूपीआई भुगतान करने के लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जाना है। MDR व्यापारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है। इसलिए 2 अक्टूबर के ‘नो UPI डे’ का असर मुख्य रूप से उन दुकानों और प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा, जहां व्यापारी उस दिन UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला करेंगे।
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यदि किसी दुकान या प्रतिष्ठान का संचालक ‘नो यूपीआई डे’ में शामिल होता है, तो वहां यूपीआई के बजाय नकद या उपलब्ध अन्य भुगतान माध्यम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। हालांकि, यह प्रत्येक व्यापारी के निर्णय पर निर्भर करेगा। 2 अक्टूबर को देशभर में यूपीआई सेवा बंद होने की घोषणा नहीं हुई है।
