Varanasi के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के पुष्कर तालाब की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। देव दीपावली से पहले तालाब की सीढ़ियां दोबारा धंसने लगी हैं। करीब 4.5 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुंदरीकरण कार्य के बावजूद सीढ़ियों का बार-बार क्षतिग्रस्त होना निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। हर साल यहां जागृति फाउंडेशन की ओर से भव्य देव दीपावली मनाई जाती है, लेकिन इस बार जर्जर सीढ़ियों ने आयोजन की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सामाजिक संस्था ने नगर आयुक्त से तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। संस्था का कहना है कि समय रहते स्थायी समाधान नहीं हुआ तो श्रद्धालुओं (Varanasi) की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और दीपोत्सव की भव्यता पर भी असर पड़ेगा।
प्राचीन धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है पुष्कर तालाब
पुष्कर तालाब का धार्मिक महत्व प्राचीन काल से रहा है। मान्यता है कि भगवान शंकर के काशी आगमन के समय उनका प्रथम जलाभिषेक इसी तालाब (Varanasi) के जल से हुआ था। शिव पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख बताया जाता है। धार्मिक आस्था के साथ यह तालाब काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।
हालांकि, लंबे समय तक उपेक्षा के कारण तालाब की स्थिति खराब हो गई थी। इसे बचाने और संरक्षित करने के लिए वर्ष 2004 में अभियान शुरू किया गया।
Varanasi: 2004 में शुरू हुआ था तालाब बचाने का अभियान
पुष्कर तालाब के संरक्षण के लिए सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सफाई अभियान चलाया था। इस प्रयास में संत मुरारी बापू, सुंदरलाल बहुगुणा, काशी में कमिश्नर और जिलाधिकारी रहे रमेश नितिन गोकर्ण, रमेश उपाध्याय, तत्कालीन नगर आयुक्त लालजी राय, बाबा हरदेव सिंह, तत्कालीन एडीएम सिटी नलिन अवस्थी और अटल राय सहित कई लोगों का योगदान रहा।
रामनगर पीएसी के जवानों, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेटों, वाराणसी नागरिक समाज, केंद्रीय देव दीपावली महासमिति और नगर (Varanasi) की विभिन्न संस्थाओं ने भी अभियान में भागीदारी की। नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से तालाब से जलकुंभी और खरपतवार हटाए गए। सामूहिक प्रयासों से तालाब को फिर से साफ-सुथरा बनाने की दिशा में काम हुआ।
4.5 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं टिक रहीं सीढ़ियां
तालाब की सफाई के बाद केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश सरकार ने इसके सुंदरीकरण का काम सीएंडडीएस संस्था (Varanasi) को सौंपा। करीब 4.5 करोड़ रुपये की लागत से सीढ़ियों, दीवारों और पाथ-वे सहित अन्य निर्माण कार्य कराए गए थे। इसका उद्देश्य तालाब की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को संरक्षित करने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना था।
लेकिन निर्माण के कुछ समय बाद ही सीढ़ियां क्षतिग्रस्त होने लगीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ, जिसके चलते सीढ़ियां बार-बार धंस रही हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले ही क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन अब फिर सीढ़ियां टूटने लगी हैं।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। वे निर्माण कार्य (Varanasi) की गुणवत्ता और बार-बार कराई जा रही मरम्मत की उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं।
हर साल दीपों से जगमगाता है तालाब परिसर
पुष्कर तालाब पर हर वर्ष जागृति फाउंडेशन के तत्वावधान में देव दीपावली का आयोजन किया जाता है। शुरुआत में स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं (Varanasi) के सहयोग से दीपोत्सव मनाया जाता था। बाद में जिला प्रशासन की ओर से तेल और दीपों की व्यवस्था में सहयोग मिलने लगा, जिससे आयोजन का स्वरूप और भव्य हो गया।
देव दीपावली (Varanasi) पर तालाब की सीढ़ियों और आसपास के परिसर में सैकड़ों दीप जलाए जाते हैं। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठता है। यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन चुका है।
हालांकि, इस बार क्षतिग्रस्त सीढ़ियों के कारण आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। जर्जर हिस्सों से श्रद्धालुओं के आवागमन में खतरा हो सकता है। ऐसे में आयोजन से पहले मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम जरूरी माने जा रहे हैं।
नगर आयुक्त से तत्काल मरम्मत की मांग
जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा कि पुष्कर तालाब की सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। हर साल यहां देव दीपावली (Varanasi) का आयोजन होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए चिंता है कि इस बार कार्यक्रम कैसे होगा।
उन्होंने नगर आयुक्त से अपील की कि देव दीपावली से पहले सीढ़ियों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि दीपोत्सव भव्य रूप से आयोजित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुष्कर तालाब काशी की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर है। इसे सुरक्षित रखना नगर निगम और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
रामयश मिश्र के मुताबिक, बार-बार सीढ़ियों का क्षतिग्रस्त होना गंभीर समस्या है। केवल मरम्मत कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर स्थायी समाधान निकालना भी जरूरी है।
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अब देखना होगा कि देव दीपावली (Varanasi) से पहले नगर निगम और संबंधित विभाग तालाब की सीढ़ियों को दुरुस्त करा पाते हैं या नहीं। फिलहाल काशी की इस ऐतिहासिक धरोहर पर दीपोत्सव की तैयारियां जर्जर सीढ़ियों की चुनौती के बीच हैं।
