Varanasi: रोहनिया थाना क्षेत्र के बैरवन स्थित पाल बस्ती में छुट्टा सांड का आतंक एक बुजुर्ग की जान ले गया। शनिवार की देर रात अपने घर के द्वार पर सो रहे 65 वर्षीय शारदा पाल पर एक मरकहा सांड ने अचानक हमला कर दिया। सांड के हमले से बचने के लिए बुजुर्ग ने घर के अंदर भागकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावर सांड ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। वह घर के गलियारे में घुस गया और शारदा पाल को दीवार से दबा दिया। गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
परिजनों के अनुसार, शारदा पाल शनिवार की रात अपने घर के द्वार पर सो रहे थे। इसी दौरान अचानक वहां पहुंचे छुट्टा सांड ने उन पर हमला बोल दिया। सांड के हमले से बचने के लिए वह उठकर घर के अंदर भागे, लेकिन सांड भी उनके पीछे-पीछे घर के गलियारे में घुस गया। वहां उसने बुजुर्ग को दीवार की तरफ दबाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर परिजन (Varanasi) और आसपास के लोग मौके पर दौड़े। लोगों ने किसी तरह सांड को मारपीट कर वहां से भगाया, लेकिन तब तक शारदा पाल की मौत हो चुकी थी।

घटना की सूचना परिजनों ने रोहनिया पुलिस को दी। हादसे की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। बुजुर्ग की मौत से (Varanasi) परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया गया कि शारदा पाल की पारिवारिक स्थिति बेहद दयनीय है। उनके परिवार में दो बेटे और तीन बेटियां हैं। परिवार के मुखिया की अचानक मौत से उनके सामने आर्थिक और पारिवारिक संकट खड़ा हो गया है।
तीन बार शारदा पाल पर कर चुका था हमला
ग्रामीणों ने बताया कि हमला करने वाला मरकहा सांड पिछले कई दिनों से गांव में आतंक का पर्याय बना हुआ है। वह इससे पहले भी शारदा पाल पर तीन बार हमला कर चुका था। इसके अलावा गांव के ही गणेशु पाल को दो बार हमला कर घायल कर चुका है। (Varanasi) ग्रामीणों का दावा है कि अब तक यह सांड गांव के दर्जनों लोगों को हमला कर घायल कर चुका है। इसके बावजूद सांड के आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि सांड के हमलावर स्वभाव के कारण लोग घरों से बाहर निकलने और रास्तों पर आने-जाने में भी डरने लगे हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को लेकर परिवार के लोग चिंतित रहते हैं। रात के समय घर के बाहर सोना भी अब खतरे से खाली नहीं रह गया है।
पहले से खतरे की जानकारी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जिस सांड के हमले से कई लोग पहले ही घायल हो चुके थे, उसी ने अब एक बुजुर्ग की जान ले ली। लोगों ने (Varanasi) छुट्टा और आक्रामक पशुओं को पकड़वाने तथा उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस हमलावर सांड को पकड़ लिया गया होता तो शायद शारदा पाल की जान बच सकती थी।
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इस (Varanasi) दर्दनाक घटना ने एक बार फिर गांवों में छुट्टा पशुओं के बढ़ते आतंक और जिम्मेदार विभागों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल सांड को पकड़कर गांव से हटाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति को अपनी जान न गंवानी पड़े।
