Varanasi: बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए ओडिशा पहुंचा 161 टन वजनी विशाल बॉयलर शुक्रवार सुबह सन्दहां रिंग रोड, चिरईगांव और उमरहा होते हुए चौबेपुर के वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर पहुंचा। 41 मीटर लंबे और 8.5 मीटर चौड़े बॉयलर को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रीलबाज और इन्फ्लुएंसर भी मौके पर पहुंचे और इसके साथ रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे। इन रीलों से वे व्यूज और फॉलोअर्स के साथ कमाई भी कर रहे हैं।

Varanasi: रोजाना सिर्फ 10-15 किमी की रफ़्तार
जानकारी के अनुसार चीनी उद्योग के वेस्ट मैटेरियल से प्लास्टिक बनाने वाले प्लांट के लिए यह बॉयलर चार माह पहले ओडिशा से लखीमपुर खीरी के कुंभी के लिए रवाना हुआ था। करीब 30-40 कर्मचारियों का दल इसे लेकर चल रहा है। भारी-भरकम काफिला रोजाना 10 से 50 किलोमीटर तक ही सफर कर पाता है। इसके साथ पिकअप, ट्रेलर, ट्रक, हाइड्रा और जेसीबी भी चल रहे हैं।

चौबेपुर में बने फुटओवरब्रिज (Varanasi) के नीचे से बॉयलर लदे ट्रेलर को निकालने के लिए ब्रिज को उठाया जाएगा। इसके बाद ही विशाल ट्रेलर आगे बढ़ सकेगा। शनिवार को काफिला कैथी टोल प्लाजा से राजवाड़ी होते हुए वाराणसी सीमा पार कर गाजीपुर जिले में प्रवेश करेगा।
बॉयलर को गंतव्य तक पहुंचाने में प्रतिदिन करीब 200 लीटर डीजल खर्च हो रहा है। कर्मचारियों के लिए ट्रेलर पर ही चारपाई और खाना बनाने की व्यवस्था है। चार माह से सफर पर निकले कई कर्मचारी अभी तक घर नहीं लौट सके हैं।

पहली बार देखा गया इतना ऊँचा महाबॉयलर
स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक नेशनल हाईवे से इतना ऊंचा सामान पहली बार गुजरते देखा गया है। हालांकि करीब दो माह पहले इसी रास्ते से 174 टन वजनी, 50 मीटर लंबा और 7.3 मीटर ऊंचा बॉयलर भी कुंभी पहुंचाया गया था। मौजूदा बॉयलर के 26 से 30 अक्टूबर के बीच कुंभी पहुंचने की संभावना है।
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यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस की टीम (Varanasi) भी मौके पर मुस्तैद रही। टीएसआई शिवबदन यादव और कांस्टेबल संजीत कुमार ने यातायात नियंत्रित कर बॉयलर के सुरक्षित आवागमन में सहयोग किया।

