Varanasi: शहर के घाटों पर संगीत और नृत्य की साधना ने एक बार फिर माहौल को सुरमय बना दिया। जिला प्रशासन की अभिनव सांस्कृतिक पहल ‘सुबह-ए-बनारस’ के अंतर्गत आयोजित ‘घाट संध्या’ कार्यक्रम में सुर, साधना और बनारस की सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। वायलिन के मधुर सुरों से लेकर तबले की थाप और कथक के घुंघरुओं की झंकार तक, कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के प्रथम चरण की शुरुआत कोलकाता से आए युवा वायलिन वादक सौपर्णो घोष की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ और ‘रघुपति राघव’ की प्रस्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद (Varanasi) वायलिन और तबले की जुगलबंदी ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ तबला वादक सुमन सरकार ने संगत की। प्रस्तुति का समापन ‘शिव कैलाशों के वासी’ से हुआ।

कथक की भाव-भंगिमाओं ने बांधा समां
कार्यक्रम के दूसरे चरण में वाराणसी (Varanasi) की कलाकार सुनिधि पाठक ने उत्तर भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य शैली कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने सबसे पहले देवी स्तुति से नृत्य का शुभारंभ किया। इसके बाद धमार ताल और अंत में ताल ठुमरी की प्रस्तुति से कार्यक्रम को ऊंचाई दी।

सुनिधि पाठक ने पद, लय, ताल और अंग संचालन के साथ घुंघरुओं की झंकार से कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी भाव-भंगिमाओं और नृत्य की लयबद्धता ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
Varanasi: कलाकारों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को प्रमाण पत्र और आशीर्वचन देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, वाराणसी क्षेत्र के निदेशक अभिजीत दीक्षित, समाजसेवी एवं सुरगंगा के आयोजक आलोक पारिख, धर्मवीर यादव, पीके श्रीवास्तव, केके श्रीवास्तव, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीण कुमार केसरी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रयागराज अपराजिता केसरी ने प्रदान किया।

कार्यक्रम (Varanasi) का धन्यवाद ज्ञापन श्याम कुमार केसरी ने किया। वहीं कार्यक्रम का संयोजन ‘सुबह-ए-बनारस’ के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया और सफल संचालन सीमा केसरी ने किया।
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इस अवसर पर डॉ. प्रेम नारायण सिंह समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। दर्शकों ने वायलिन, तबला और कथक की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। संगीत और नृत्य की इस सांस्कृतिक संध्या ने काशी की समृद्ध कला परंपरा और शास्त्रीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।

