Varanasi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन पर वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम महज जन्मदिन का उत्सव नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए पार्टी ने धार्मिक आस्था, नदी संरक्षण और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपना सियासी संदेश भी देने की कोशिश की।
महानगर युवजन सभा समाजवादी पार्टी के बैनर तले वरुणा नदी के शास्त्री घाट पर सूर्योदय के समय सात ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ वरुणा (Varanasi) की महाआरती की और अखिलेश यादव के दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव का बड़ा कटआउट लगाकर उनका दूध से अभिषेक किया गया और उन्हें वरुणा नदी (Varanasi) के भगीरथ के रूप में प्रस्तुत किया गया। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने 2027 के विधानसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करते हुए अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प भी दोहराया।
Varanasi: वरुणा कॉरिडोर के अधूरे सपने को फिर बनाया मुद्दा
कार्यक्रम के जरिए समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वरुणा कॉरिडोर के अधूरे प्रोजेक्ट को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की। सपा नेताओं ने याद दिलाया कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते गोमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर वाराणसी में वरुणा नदी (Varanasi) के जीर्णोद्धार और वरुणा कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की गई थी।
उनका आरोप है कि 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। अखिलेश यादव भी कई सार्वजनिक मंचों से योगी आदित्यनाथ सरकार पर अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की अनदेखी करने का आरोप लगाते रहे हैं।
भाजपा सरकार पर साधा निशाना
इस अवसर पर युवजन सभा के प्रदेश महासचिव और वरिष्ठ सपा नेता किशन दीक्षित ने भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की नदियां या तो सूख रही हैं या फिर गंदे नालों में तब्दील होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार की कई जनहित योजनाओं को बंद कर दिया गया है।

किशन दीक्षित ने कहा कि वरुणा और असि नदी के संगम से इस शहर का नाम वाराणसी पड़ा, लेकिन आज वरुणा नदी की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनका कहना था कि गंगा (Varanasi) के विकास और उसकी निर्मलता-अविरलता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन न गंगा, न असि और न ही वरुणा नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया कि वरुणा नदी आज भी ऐसे नेतृत्व का इंतजार कर रही है जो उसका वास्तविक पुनर्जीवन कर सके।
2027 की लड़ाई का भी किया ऐलान
महानगर युवजन सभा के अध्यक्ष राहुल गुप्ता ने अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी और अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। कार्यक्रम (Varanasi) का संयोजन किशन दीक्षित, राहुल गुप्ता, अशोक यादव ‘नायक’, राजू जायसवाल, मनोज सिंह, संदीप मिश्रा, अनूप खरवार, दिलीप कश्यप, राहुल यादव ने किया, जबकि इसमें सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तख्तियों पर लिखे नारों ने खींचा लोगों का ध्यान
महाआरती के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उन तख्तियों की रही जिन पर वरुणा नदी की पीड़ा और राजनीतिक संदेश एक साथ दिखाई दिए। “PDA का मतलब – प्यासे को पानी, दरिया को जीवन, आबादी को सम्मान”, “PDA का सूरज उगेगा – वरुणा का अंधेरा मिटेगा”, “वरुणा कहती हैं – बदलाव चाहिए, अखिलेश चाहिए” और “गंगा की छोटी बहन वरुणा कहे – अखिलेश आएं तो मेरा उद्धार हो” जैसे स्लोगन लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने। इन नारों के जरिए एक ओर नदी संरक्षण का मुद्दा उठाया गया तो दूसरी ओर उन्हें 2027 के चुनावी अभियान से भी जोड़ने की कोशिश साफ दिखाई दी।
अब नजर 2027 पर
वाराणसी (Varanasi) में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक अनुष्ठान से कहीं आगे बढ़कर एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने का प्रयास नजर आया। वरुणा नदी के बहाने समाजवादी पार्टी ने विकास, पर्यावरण और चुनावी रणनीति को एक मंच पर जोड़ने की कोशिश की।
हालांकि इन नारों और प्रतीकों का असर जनता पर कितना पड़ता है और 2027 के विधानसभा चुनाव में यह रणनीति कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है, इसका जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। आखिरकार लोकतंत्र में अंतिम फैसला नारों से नहीं, जनता के मत से तय होता है।

