Varanasi: सनातन परंपरा में भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप माना जाता है, लेकिन उनकी सबसे अनोखी विशेषता यह है कि वे अपने भक्तों के प्रेम में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान महोत्सव के दौरान भक्तों को दर्शन देने के बाद मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद तीनों विग्रह 14 दिनों के लिए एकांतवास (अनवसर काल) में चले जाते हैं। इस अवधि में मंदिर के पट बंद रहते हैं और भगवान की सेवा एक रोगी की भांति की जाती है।
वाराणसी के जगन्नाथ मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि भगवान (Varanasi) के अस्वस्थ होने के दौरान उन्हें सामान्य भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि आयुर्वेदिक गुणों से युक्त विशेष काढ़ा और अन्य औषधीय भोग अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा एवं पारंपरिक विधि से निभाई जाती है।
उन्होंने बताया कि भगवान को अर्पित किए जाने वाले काढ़े का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है। इसमें काली मिर्च, लौंग, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, जायफल, खांडसारी, तुलसी, कच्ची चीनी सहित कई औषधीय सामग्री मिलाई जाती है। लगभग एक घंटे तक धीमी आंच पर पकने के बाद यह काढ़ा तैयार होता है। पहले भगवान को इसका भोग (Varanasi) लगाया जाता है, फिर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
आइए जानते हैं, भगवान जगन्नाथ को अर्पित होने वाले काढ़े में शामिल औषधियों के गुण
- काली मिर्च – शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। यह सर्दी, जुकाम और पाचन संबंधी समस्याओं (Varanasi) में लाभकारी होती है।
- लौंग – इसमें जीवाणुरोधी और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं। यह गले की खराश, खांसी और संक्रमण से बचाव में उपयोगी मानी जाती है।
- छोटी इलायची – पाचन तंत्र को मजबूत करने, मुंह की दुर्गंध दूर करने तथा शरीर को ताजगी देने में सहायक मानी जाती है।
- बड़ी इलायची – श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी मानी जाती है। यह कफ और सर्दी-जुकाम में राहत पहुंचाने में सहायक होती है।
- जायफल – शरीर को ऊर्जा देने, पाचन सुधारने तथा मानसिक शांति (Varanasi) प्रदान करने वाले गुणों के लिए जाना जाता है।
- तुलसी – आयुर्वेद में तुलसी को अमृत समान माना गया है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, वायरल संक्रमण से बचाव और श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है।
- खांडसारी – प्राकृतिक मिठास का स्रोत होने के साथ यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है तथा काढ़े के स्वाद और औषधीय संतुलन (Varanasi) को बनाए रखती है।
- कच्ची चीनी – शरीर को ऊर्जा देने के साथ औषधीय मिश्रण के स्वाद को संतुलित करती है और पारंपरिक काढ़े का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
Varanasi: 14 दिनों तक चलता है उपचार
पुजारी राधेश्याम पांडेय के अनुसार, भगवान जगन्नाथ (Varanasi) को लगातार 14 दिनों तक विभिन्न औषधीय भोग अर्पित किए जाते हैं। इस दौरान भगवान विश्राम करते हैं और उनके दर्शन नहीं होते। मान्यता है कि औषधीय सेवा और विश्राम के बाद भगवान पूर्णतः स्वस्थ होकर नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस अवसर को देखने और भगवान के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
भगवान जगन्नाथ की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारतीय आयुर्वेद, लोकजीवन और संस्कृति के गहरे संबंध को भी दर्शाती है। भक्त इसे इस संदेश के रूप में भी देखते हैं कि प्रकृति और औषधियों का महत्व मानव जीवन के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं (Varanasi) में भी सदियों से स्वीकार किया जाता रहा है।

