Varanasi: चौबेपुर क्षेत्र में बुधवार की देर शाम हुई झमाझम बारिश ने भीषण गर्मी से लोगों को राहत दिलाने के साथ ही खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान लौटा दी। कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह वर्षा किसी वरदान से कम नहीं रही। सूखने की कगार पर पहुंच चुकी धान की नर्सरी को बारिश से नई जान मिल गई है।
किसान वल्लभाचार्य पाण्डेय, और सुरेंदर राजभर सागर का कहना है कि अधिकांश स्थानों पर धान की नर्सरी अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल व्यापक स्तर पर रोपाई शुरू नहीं हो सकेगी। हालांकि जिन किसानों (Varanasi) ने 10 जून से पहले नर्सरी तैयार कर ली थी, वे अब धान की रोपाई का कार्य शुरू कर सकते हैं।
varanasi: खरीफ फसलों की बुआई का अनुकूल समय
कृषि विशेषज्ञ देवमणि त्रिपाठी ने बताया कि बारिश के बाद मौसम साफ होने पर खेतों की जुताई कर किसान मक्का, ज्वार, बाजरा के साथ दलहनी एवं तिलहनी फसलों (Varanasi) की बुआई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारिश से सबसे अधिक लाभ धान की नर्सरी को मिलेगा। यदि नर्सरी में खैरा रोग के लक्षण दिखाई दें तो जिंक का तथा सफेदा रोग के लक्षण मिलने पर फेरस सल्फेट का प्रयोग करना चाहिए।
50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं दलहनी-तिलहनी फसलों के बीज उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा तिल, मूंग, उड़द, अरहर जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा तिल, अरहर, बाजरा तथा श्रीअन्न की फसलें जैसे मड़वा (रागी), सांवा और कोदो के निःशुल्क मिनीकिट भी उपलब्ध (Varanasi) कराए जा रहे हैं।
उन्होंने किसानों (Varanasi) से अपील की कि वे अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के कर्मचारियों से संपर्क कर बीज एवं मिनीकिट की बुकिंग कराएं। ई-पॉस मशीन पर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर बीज वितरित किए जा रहे हैं। समय रहते खरीफ फसलों की बुआई कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।



