देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी एक बार फिर सावन (Sawan) के स्वागत की तैयारियों में जुट गई है। 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहे श्रावण मास को लेकर शहर के प्रमुख शिवालयों, देवालयों और धार्मिक स्थलों पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पूरे एक माह तक चलने वाले इस पावन पर्व में श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित काशी के सैकड़ों शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पूजन-अर्चन और दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान कांवड़ियों के जत्थे गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्राएं, पंचक्रोशी यात्रा, दुर्गा यात्राएं और अन्य धार्मिक आयोजन भी पूरे उत्साह के साथ संपन्न होंगे। प्रशासन और मंदिर समितियों ने भी श्रद्धालुओं (Sawan) की सुविधा के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
Sawan: चार सोमवार का विशेष संयोग
इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पहला सोमवार: 3 अगस्त
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त
वहीं सावन में पांच बृहस्पतिवार (30 जुलाई, 6, 13, 20 और 27 अगस्त) तथा पांच शुक्रवार (31 जुलाई, 7, 14, 21 और 28 अगस्त) का भी विशेष संयोग बन रहा है।
काशी के बैजनत्था में विराजमान हैं वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति
श्रावण मास (Sawan) में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ कमच्छा स्थित प्राचीन वैद्यनाथ मंदिर भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र रहेगा। काशीखंड के अनुसार यह मंदिर झारखंड के देवघर स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति माना जाता है और काशी में यह बैजनत्था नाम से प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि यहां शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा पापों से मुक्ति मिलती है। शिव महापुराण में भी वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रतिदिन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। यह मंदिर कमच्छा स्थित संकटहरण हनुमान मंदिर से सीएचएस प्राइमरी स्कूल मार्ग पर लगभग 200 मीटर आगे बैजनत्था मोहल्ले में स्थित है।
रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप का विशेष महत्व
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि सावन भगवान शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान रुद्राभिषेक, सामूहिक पार्थिव शिवलिंग पूजन, बेलपत्र अर्पण, सावन (Sawan) सोमवार व्रत, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा शिवमहापुराण कथा श्रवण का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि सावन में किए गए धार्मिक अनुष्ठान भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ जीवन में सुख, समृद्धि और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कांवड़ यात्रा और पंचक्रोशी यात्रा जैसी धार्मिक परंपराएं भी इसी माह में विशेष रूप से आयोजित की जाती हैं।
शिव यात्राओं के साथ निकलती हैं दुर्गा यात्राएं
बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ‘लिंगिया’ ने बताया कि सावन भर (Sawan) काशी में भगवान शिव की उपासना का विशेष वातावरण रहता है। पूरे महीने शिव यात्राओं के साथ-साथ दुर्गा यात्राएं निकालने की भी प्राचीन परंपरा है। श्रद्धालु व्रत, पूजन और जलाभिषेक के माध्यम से भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
सावन में आस्था के साथ चमकेगी काशी की अर्थव्यवस्था: 300 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद
सावन (Sawan) शुरू होते ही काशी की गलियां “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठेंगी। गंगा घाटों से लेकर मंदिरों तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देंगी। फूल, बेलपत्र, दूध, भांग, धतूरा, पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर भी रौनक बढ़ जाएगी। धार्मिक आयोजनों के साथ शहर का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाएगा। प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और विभिन्न धार्मिक संस्थाएं श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारियों में जुटी हैं।

